उत्तर प्रदेश में एनएचएम के तहत जनपद स्तर पर तैनात बांड चिकित्सकों का मानदेय बढ़ाकर एक लाख रुपये प्रतिमाह कर दिया गया है. शासन ने वॉक-इन-इंटरव्यू के माध्यम से नियुक्त चिकित्सकों के लिए इस संबंध में आदेश जारी किया है.
सतीश सिंह, लखनऊ. उत्तर प्रदेश में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के अंतर्गत बांड पर जनपद स्तर पर तैनात एमबीबीएस और पीजी चिकित्सकों का मानदेय मेडिकल कॉलेजों में तैनात बांड चिकित्सकों के बराबर होगा. शासन ने वॉक-इन-इंटरव्यू के माध्यम से जनपदों में नियुक्त चिकित्सकों का मानदेय बढ़ाकर एक लाख रुपये प्रतिमाह किए जाने की सहमति देते हुए आदेश जारी कर दिया है.
विशेष सचिव ने जारी किया आदेश
गुरुवार को चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के विशेष सचिव रवि रंजन की ओर से जारी आदेश के मुताबिक, राजकीय मेडिकल कॉलेजों और संस्थानों से एमबीबीएस पूरा कर चुके चिकित्सकों को एनएचएम के माध्यम से जनपद स्तर पर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी) में संविदा चिकित्सक के रूप में तैनात किया गया है.
इन चिकित्सकों को वॉक-इन-इंटरव्यू के आधार पर जनपदों की श्रेणी के अनुसार 50 हजार से 65 हजार रुपये प्रतिमाह तक मानदेय दिया जा रहा है.
एक लाख रुपये होगा मानदेय
जारी आदेश में कहा गया है कि जनपदों में तैनात एमबीबीएस और पीजी चिकित्सकों के मानदेय को राज्य स्तर पर पीजी जूनियर रेजिडेंट को मिलने वाले मानदेय के बराबर किए जाने की मांग की जा रही थी.
इसे देखते हुए वॉक-इन-इंटरव्यू के माध्यम से चयनित चिकित्सकों का मानदेय बढ़ाकर 1,00,000 रुपये प्रतिमाह किए जाने का निर्णय लिया गया है. आदेश में स्पष्ट किया गया है कि यह मानदेय वृद्धि एनएचएम के अंतर्गत कार्यरत चिकित्सकों पर भी प्रभावी होगी.



