मयंक श्रीवास्तव, अयोध्या. श्रीराम जन्मभूमि पर चल रहे भव्य राम मंदिर के निर्माण कार्यों को लेकर निर्माण समिति की दो दिवसीय बैठक के दूसरे दिन आज निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा ने महत्वपूर्ण जानकारी दी. उन्होंने मंदिर के निर्माण कार्यों की वर्तमान स्थिति, भविष्य की योजनाओं और चल रहे विवादों पर खुलकर बात की.
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नृपेंद्र मिश्रा ने कहा कि “अयोध्या में भगवान राम का भव्य मंदिर बनना करोड़ों श्रद्धालुओं के सपने का साकार होना है. यह सिर्फ एक मंदिर नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक चेतना का प्रतीक है. उन्होंने स्पष्ट किया कि मंदिर निर्माण में केंद्र या राज्य सरकार का एक भी रुपया नहीं लगा है. पूरा निर्माण श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट द्वारा देशभर के रामभक्तों से एकत्रित किए गए धन से कराया गया है.
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70 में से 60 कार्य पूरे
नृपेंद्र मिश्रा के मुताबिक, राम मंदिर परिसर के लिए तय किए गए करीब 70 प्रमुख निर्माण कार्यों में से लगभग 60 कार्य पूरे हो चुके हैं. पूरे हो चुके सभी निर्माण कार्यों को औपचारिक रूप से निर्माण एजेंसियों द्वारा श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को सौंप दिया गया है. अब इन सभी कार्यों का रखरखाव और संचालन ट्रस्ट द्वारा ही किया जाएगा. उन्होंने बताया कि 30 सितंबर तक राम मंदिर परिसर के लगभग सभी प्रमुख निर्माण कार्य पूरे कर लिए जाएंगे.
जलभराव की समस्या का होगा स्थायी समाधान
बारिश के दौरान राम मंदिर परिसर में होने वाली जलभराव की समस्या को लेकर भी बड़ा फैसला लिया गया है. नृपेंद्र मिश्रा ने बताया कि परिसर की सीवेज और ड्रेनेज व्यवस्था को अब नगर के मुख्य नाले से जोड़ा जाएगा, ताकि पानी की निकासी सुचारू रूप से हो सके और श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो.
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म्यूजियम, ऑडिटोरियम और ट्रस्ट कार्यालय पर फोकस
अब निर्माण समिति का विशेष ध्यान शेष बचे महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स पर है, जिसमें संग्रहालय (Museum), ऑडिटोरियम और ट्रस्ट के स्थायी कार्यालय का निर्माण प्रमुख है. उन्होंने बताया कि बन रहे भव्य संग्रहालय की गैलरी नंबर-7 पर करीब 5 करोड़ रुपये की लागत आएगी. इस गैलरी में रामायण काल से जुड़े दुर्लभ प्रसंगों को दर्शाया जाएगा. इसमें प्रवेश शुल्क लगेगा या नहीं, इसका अंतिम फैसला ट्रस्ट करेगा.
विवादों पर दिया जवाब
चंपत राय द्वारा लिखे गए पत्र में अपना नाम होने के सवाल पर नृपेंद्र मिश्रा ने कहा, “मैंने वह पत्र देखा ही नहीं है. बेवजह विवाद पैदा करने की कोशिश की जा रही है. हमारा ध्यान सिर्फ निर्माण कार्य को समय पर पूरा करने पर है. वहीं राम मंदिर के CEO की नियुक्ति के लिए चल रहे साक्षात्कार के सवाल पर उन्होंने कहा कि “मैं इस चयन प्रक्रिया में शामिल नहीं हूं और मुझे इस बारे में कोई जानकारी नहीं है. यह ट्रस्ट का आंतरिक मामला है.

