संजय कुमार तिवारी, बलिया. सरयू नदी का कटान बांसडीह तहसील क्षेत्र के भोजपुरवा समेत महराजपुर, सुल्तानपुर, खादीपुर और आसपास के गांवों के लिए लगातार खतरा बना हुआ है. नदी किसानों की कृषि भूमि को काटते हुए अपने आगोश में समेट रही है. तहसीलदार नितिन कुमार सिंह ने कटान प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण कर ग्रामीणों से बातचीत की और स्थिति से जिलाधिकारी को अवगत कराया.
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तहसीलदार ने बताया कि सोमवार की तुलना में नदी का जलस्तर कुछ कम हुआ है, जिससे फिलहाल मामूली राहत मिली है. हालांकि लगातार हो रही बारिश के चलते नदी के दोबारा उफान पर आने की आशंका बनी हुई है. प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए है. भोजपुरवा और आसपास के गांवों में कटान के भय से लोगों की चिंता बढ़ती जा रही है. कई परिवारों ने संभावित नुकसान से बचने के लिए अपने पुश्तैनी मकानों को स्वयं ही तोड़ना शुरू कर दिया है. प्रभावित मकानों और कृषि भूमि का सर्वे पूरा कर लिया गया है. आबादी क्षेत्र में वास्तविक कटान होने पर शासन की ओर से पात्र परिवारों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाएगी. साथ ही भोजपुरवा में सोलर लाइट उपलब्ध कराने के लिए खंड विकास अधिकारी मनियर से समन्वय किया गया है.
सरयू नदी के कटान और करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद सुरक्षा कार्य प्रभावी न होने से नाराज महराजपुर और चांदपुर के ग्रामीणों ने पूर्वांचल छात्र संघर्ष समिति के संयोजक एवं पूर्व जिला पंचायत सदस्य नागेंद्र बहादुर सिंह ‘झुन्नू’ के नेतृत्व में तहसील परिसर में प्रदर्शन किया. ग्रामीणों ने तहसीलदार को ज्ञापन सौंपकर युद्धस्तर पर कटानरोधी कार्य शुरू कराने और करोड़ों रुपये की लागत से बने ठोकरों (कटर) की उच्चस्तरीय जांच की मांग की.
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झुन्नू सिंह ने आरोप लगाया कि महराजपुर को कटान से बचाने के लिए करीब 9 करोड़ रुपये की लागत से 17 ठोकरों के निर्माण की स्वीकृति मिली थी, लेकिन निर्माण में कथित अनियमितता और घटिया गुणवत्ता के कारण अधिकांश ठोकर नदी की धारा में बहने लगे हैं. इससे महराजपुर और चांदपुर गांवों पर नदी में समाहित होने का खतरा और बढ़ गया है. ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि तत्काल प्रभावी कटानरोधी कार्य नहीं कराया गया तो दोनों गांवों का अस्तित्व संकट में पड़ सकता है. उन्होंने दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई और मानकों के अनुरूप स्थायी सुरक्षा कार्य कराने की मांग की.


