गाजीपुर. कुख्यात माफिया मुख्तार अंसारी की मौत के बाद अब उसके परिवार, गैंग के सदस्यों और करीबियों को मिले शस्त्र लाइसेंसों की जांच में बड़े खुलासे हुए हैं. यूपी पुलिस ने जांच के दौरान गंभीर गड़बड़ियां मिलने पर गाजीपुर में 5 एफआईआर दर्ज की हैं. इनमें गाजीपुर से सांसद अफजाल अंसारी, मुख्तार अंसारी की पत्नी अफसा बेगम समेत कई पूर्व शस्त्र लिपिक और सरकारी कर्मचारियों को आरोपी बनाया गया है.
पुलिस महानिदेशक के निर्देश पर यूपी एसटीएफ की सूचना के आधार पर वाराणसी रेंज के डीआईजी ने गाजीपुर पुलिस से जांच कराई. जांच में मुख्तार अंसारी के परिवार के 5 लोगों, गैंग के 11 सदस्यों और 27 अन्य लोगों के कुल 43 शस्त्र लाइसेंसों की पड़ताल की गई. इन लाइसेंसों पर खरीदे और बेचे गए 80 से ज्यादा हथियारों का भी भौतिक सत्यापन किया गया.
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जांच में सबसे बड़ी बात यह सामने आई कि कई हथियारों से जुड़े सरकारी रिकॉर्ड और लाइसेंस की मूल फाइलें जिला मजिस्ट्रेट कार्यालय से गायब हैं. पुलिस का आरोप है कि लाइसेंसधारकों ने तत्कालीन शस्त्र लिपिकों और अन्य कर्मचारियों की मिलीभगत से ये रिकॉर्ड गायब कराए, ताकि हथियारों की वास्तविक स्थिति छिपाई जा सके और उनका हिसाब न मिल सके.
जांच में यह भी पता चला कि एक ही शस्त्र लाइसेंस पर कई बार हथियार खरीदे और बेचे गए, लेकिन उनके पूरे रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं हैं. इससे यह संदेह पैदा हुआ है कि हथियारों का इस्तेमाल अपराधों में किया गया या उन्हें कहीं और पहुंचाया गया. एक मामले में फर्जी पता देकर शस्त्र लाइसेंस लेने का आरोप भी सामने आया है.
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इन मामलों में दर्ज पांच एफआईआर में तीन मुकदमे अफजाल अंसारी से जुड़े हैं. उन पर आरोप है कि उनके नाम पर जारी लाइसेंसों से संबंधित रायफल और रिवॉल्वर के रिकॉर्ड गायब कराए गए, जिससे हथियारों का सत्यापन नहीं हो सका. वहीं मुख्तार अंसारी की पत्नी अफसा बेगम पर भी शस्त्र लाइसेंस से जुड़े रिकॉर्ड गायब कराने का आरोप लगाया गया है. पुलिस के अनुसार अफसा बेगम फिलहाल फरार हैं.
पांचवां मुकदमा मुख्तार गैंग के सहयोगी मोहम्मद शाहिद के खिलाफ दर्ज हुआ है. आरोप है कि उसने अपना असली पता छिपाकर फर्जी पते पर शस्त्र लाइसेंस बनवाया. पुलिस का कहना है कि उस समय के थाना प्रभारी और क्षेत्रीय लेखपाल ने बिना सही जांच के उसकी रिपोर्ट लगा दी थी.
इन सभी मामलों की जांच के लिए गाजीपुर में एसआईटी बनाई गई है. एसआईटी की निगरानी अपर पुलिस अधीक्षक (नगर) करेंगे. जांच के दौरान उस समय तैनात सभी शस्त्र लिपिकों, अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच होगी. पुलिस का कहना है कि जो भी दोषी मिलेगा, उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी. यूपी पुलिस का कहना है कि मुख्तार अंसारी गैंग और उसके परिजनों व सहयोगियों को जारी बाकी शस्त्र लाइसेंसों की जांच अभी जारी है. अगर आगे और गड़बड़ियां सामने आती हैं तो उन पर भी मुकदमे दर्ज किए जाएंगे.


