गोविंद पटेल, कुशीनगर. कहते हैं कि कानून का डर होना चाहिए, लेकिन यहां तस्वीर कुछ और है. एक तरफ पुलिस का फ्लैग मार्च है, दूसरी तरफ नशे का खुला बाजार. दोनों एक ही सड़क पर चलते हैं, लेकिन शायद एक-दूसरे को देखते नहीं. जनपद कुशीनगर के रामकोला कस्बे में थाने से कुछ ही दूरी रामकोला कसया मुख्य मार्ग पर कथित तौर पर गांजे की पुड़िया खुलेआम बेची जा रही है. ऐसे में कानून व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा हो रहा है.
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स्थानीय लोगों का आरोप है कि शाम होते ही नशे के आदी युवाओं की भीड़ जुटती है और एक मकान से यह कारोबार चलता है. सवाल यह है कि जिस रास्ते से रोज पुलिस का फ्लैग मार्च गुजरता है, वहां यह सब कैसे दिखाई नहीं देता. अगर लोगों का यह आरोप सही है कि सूचना देने के बावजूद कार्रवाई नहीं हो रही, तो फिर फ्लैग मार्च का उद्देश्य क्या है. क्या वह केवल लोगों को यह बताने के लिए है कि पुलिस सड़क पर है या यह भरोसा दिलाने के लिए कि कानून भी मौजूद है.
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वहीं सबसे बड़ी कीमत युवा पीढ़ी चुका रही है. नशा केवल एक पुड़िया नहीं बेचता, वह धीरे-धीरे परिवार, भविष्य और समाज को भी बेच देता है. अब निगाह इस बात पर है कि पुलिस इन आरोपों की निष्पक्ष जांच कर अवैध कारोबार पर कार्रवाई करती है या फिर फ्लैग मार्च चलता रहेगा और उसी रास्ते पर नशे का कारोबार भी. सवाल सिर्फ एक कस्बे का नहीं, कानून के भरोसे का है.

