लखनऊ. सांसद अखिलेश यादव ने मंगलवार को लोकसभा में लोक परीक्षा संशोधन विधेयक-2026 पर चर्चा के दौरान केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला. उन्होंने कहा कि नीट परीक्षा लीक के खिलाफ छात्रों और युवाओं के आंदोलन ने सरकार को झुकने पर मजबूर कर दिया. उन्होंने आंदोलन में शामिल छात्रों, युवाओं और उनके अभिभावकों को बधाई देते हुए कहा कि यह नई पीढ़ी की एकजुटता और लोकतांत्रिक ताकत की बड़ी जीत है.
अखिलेश यादव ने कहा कि आंदोलन की सफलता के बाद देशभर में नारा गूंजा, “झुकती है सरकार, झुकाने वाला चाहिए.” उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने करोड़ों छात्रों की मांग के दबाव में फैसला लिया, लेकिन अब भी पूरे मामले में पारदर्शिता नहीं बरत रही है.
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उन्होंने पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे का जिक्र करते हुए कहा कि अगले दिन सदन में भाजपा सांसदों ने उनका स्वागत इसलिए किया क्योंकि “एक प्रधान को हटाकर प्रधानमंत्री को बचा लिया गया.” सपा प्रमुख ने सवाल उठाया कि 2024 में कानून बनने के बावजूद नीट पेपर लीक क्यों हुआ और 2026 में छात्रों को दोबारा आंदोलन क्यों करना पड़ा? उन्होंने कहा कि पेपर लीक रोकने के लिए कानून पहले से मौजूद था, लेकिन सरकार उसे प्रभावी ढंग से लागू नहीं कर सकी.
अखिलेश यादव ने दावा किया कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में उत्तर प्रदेश में 20 से अधिक भर्ती और बोर्ड परीक्षाओं के पेपर लीक हुए, जिनमें दरोगा भर्ती, जूनियर इंजीनियर, ग्राम विकास अधिकारी, टीईटी, हाईस्कूल, इंटरमीडिएट और सिपाही भर्ती जैसी परीक्षाएं शामिल हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि नीट परीक्षा भी कानून बनने के बाद दो बार लीक हुई.
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उन्होंने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) में आउटसोर्सिंग के जरिए भर्ती पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार बताए कि परीक्षा प्रणाली की जिम्मेदारी संभालने वाले लोग कौन थे और जवाबदेही किसकी है. भाजपा सरकार ने शिक्षा व्यवस्था को कमजोर किया, प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालय बंद किए तथा 69 हजार शिक्षक भर्ती में पिछड़े और दलित अभ्यर्थियों के साथ अन्याय किया. उन्होंने कहा कि शिक्षक अभ्यर्थी अदालतों से लेकर आंदोलन तक कर रहे हैं, लेकिन उन्हें न्याय नहीं मिल रहा.
सपा अध्यक्ष ने नीट पेपर लीक के बाद जान गंवाने वाले छात्रों को श्रद्धांजलि देते हुए पीड़ित परिवारों की सहायता की मांग की. उन्होंने रामपुर स्थित मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय का भी उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि सरकार नफरत की राजनीति के तहत संस्थानों को निशाना बना रही है. शिक्षा अच्छी होगी, परीक्षा सच्ची होगी तो तरक्की भी पक्की होगी, लेकिन सरकार की नीयत साफ नहीं है. नीयत साफ होगी, तभी परीक्षा भी साफ होगी.


