सतीश सिंह, लखनऊ. विश्व युवा कौशल दिवस-2026 के अवसर पर इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश की सबसे बड़ी ताकत उसकी युवाशक्ति है. प्रदेश के पास दुनिया की सबसे बड़ी युवा कार्यशक्ति में से एक है और सरकार इसे डेमोग्राफिक डिविडेंड के रूप में कौशल विकास से जोड़कर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का कार्य कर रही है.
मुख्यमंत्री ने कहा कि “भविष्य तभी साझा होता है, जब अवसर साझा होते हैं और अवसर तब साझा होते हैं, जब उस सोच की कोई सरकार हो.” उन्होंने कहा कि आज उत्तर प्रदेश में स्किलिंग और रोजगार के क्षेत्र में जो परिवर्तन दिखाई दे रहा है, वह सरकार की दूरदर्शी नीतियों का परिणाम है.
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पूर्ववर्ती सरकारों पर निशाना साधते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2017 से पहले प्रदेश में युवाओं के सामने पहचान का संकट था. शिक्षा व्यवस्था चौपट थी, कौशल विकास की कोई प्रभावी व्यवस्था नहीं थी और सरकारी नौकरियों में परिवारवाद और भ्रष्टाचार हावी था. उन्होंने आरोप लगाया कि नौकरी निकलने पर “चाचा-भतीजे की जोड़ी” वसूली के लिए निकल पड़ती थी और कई बार भर्ती प्रक्रियाओं पर न्यायालय को रोक लगानी पड़ती थी. उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश बीमारू नहीं था, बल्कि तत्कालीन सरकारों के कृत्य और मानसिकता बीमारू हो गई थी.
मुख्यमंत्री ने कहा कि युवाओं को अवसर, कौशल और सम्मानजनक रोजगार उपलब्ध कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है और यही उत्तरप्रदेश को विकसित और आत्मनिर्भर बनाने का सबसे सशक्त माध्यम है. इससे पूर्व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कार्यक्रम में कौशल विकास प्रदर्शनी का उद्घाटन किया और ‘कौशलम’ पुस्तिका का विमोचन किया, जिसमें केंद्र एवं राज्य सरकार के कौशल विकास संबंधी कार्यों और उपलब्धियों का संकलन किया गया है. इस अवसर पर उन्होंने 11 युवा आइकॉन, उत्कृष्ट आईटीआई संस्थानों, प्रशिक्षण प्रदाताओं और विभिन्न एजेंसियों को सम्मानित भी किया.
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व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमशीलता मंत्री कपिल देव अग्रवाल ने कहा कि उत्तर प्रदेश में युवाओं को कौशल के माध्यम से रोजगार और स्वरोजगार से जोड़ने का व्यापक अभियान चलाया जा रहा है. उन्होंने बताया कि योगी सरकार के पिछले नौ वर्षों में प्रदेश के 20 लाख युवाओं को कौशल प्रशिक्षण प्रदान किया गया है, जिनमें से 12.50 लाख युवाओं को रोजगार प्राप्त हुआ है. वर्ष 2026-27 में 10 लाख युवाओं को प्रशिक्षण देने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है.
उन्होंने बताया कि विभाग का बजट नौ गुना बढ़ाकर 3,310 करोड़ रुपये किया गया है. टाटा समूह के साथ 7,000 करोड़ रुपये का सीएसआर एमओयू किया गया है, जिसके तहत प्रदेश के 225 आईटीआई संस्थानों को अत्याधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित किया जा रहा है. युवाओं को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स और इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी) जैसे आधुनिक ट्रेड्स में प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है.
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रोजगार के अवसरों को और सुलभ बनाने के लिए ‘ब्लू डॉट’ सॉफ्टवेयर विकसित किया गया है, जहां युवा अपना बायोडाटा अपलोड कर सकेंगे और विभिन्न कंपनियां सीधे उनसे संपर्क कर सकेंगी. इसके अलावा ‘प्रोजेक्ट प्रवीण’ के तहत स्कूली बच्चों को कौशल प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जबकि ‘जीरो पॉवर्टी’ योजना के अंतर्गत निर्धन परिवारों के युवाओं, महिलाओं और दिव्यांगजनों को रोजगार एवं स्वरोजगार से जोड़ने के लिए विशेष अभियान संचालित किया जा रहा है.

