लखनऊ. देश भर के सरकारी स्कूलों की स्थिति और बच्चों की शिक्षा व्यवस्था को लेकर जारी बहस के बीच बीएसपी सुप्रीमो मायावती ने सरकारी स्कूलों की बदतर हालत पर चिंता जताई है. उन्होंने कहा कि बेहतर शिक्षा और सुखद भविष्य की उम्मीद रखने वाले स्कूली छात्र-छात्राएं और उनके अभिभावक अब स्कूलों की जमीनी हकीकत को लेकर मुखर हो रहे हैं.

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सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पोस्ट जारी कर मायावती ने देशभर, विशेषकर उत्तर प्रदेश और उत्तर भारत के राज्यों में सरकारी स्कूलों की बदतर हालत पर चिंता जताई है. उन्होंने कहा कि जेन-अल्फा के स्कूली छात्र-छात्राएं और उनके अभिभावक अच्छे भविष्य के लिए अच्छी शिक्षा को लेकर चिंतित हैं और इसके लिए जद्दोजहद कर रहे हैं, लेकिन स्कूलों की खराब स्थिति के कारण वे अब अति-मुखर हो गए हैं. उन्होंने दावा किया कि ये लोग जेन-जी के देशव्यापी ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान में उत्साहपूर्वक भाग ले रहे हैं.

उन्होंने दुख जताते हुए कहा कि जिन मासूम बच्चों के हंसने-खेलने और पढ़ने-लिखने के दिन हैं, उन्हें बुनियादी सुविधाओं के लिए सड़कों पर संघर्ष करना पड़ रहा है. मायावती ने डॉ. भीमराव अंबेडकर के ‘शिक्षित बनो’ आह्वान का उल्लेख करते हुए कहा कि स्कूली शिक्षा बहुजन समाज के लिए हमेशा विशेष चिंता का विषय रही है. उनके नेतृत्व में बीएसपी की चारों उत्तर प्रदेश सरकारों में इन वर्गों के हित, कल्याण और शिक्षा पर पूरा ध्यान दिया गया, ताकि संविधान के अनुरूप रोटी-रोजी और शिक्षा युक्त आत्मसम्मानपूर्ण जीवन मिल सके.

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मायावती ने आरोप लगाया कि सरकारी स्कूलों को बेहतर बनाने की बजाय विभिन्न सरकारों ने इसकी अनदेखी की है और शिक्षा व्यवस्था को आरक्षण की तरह निष्क्रिय बनाने का कुचक्र चलाया है. हजारों सरकारी स्कूल बंद किए जा रहे हैं, जिसका बीएसपी ने लगातार विरोध किया है. अब स्कूल भवन, शिक्षक, पेयजल, शौचालय और साफ-सफाई जैसी बुनियादी जरूरतों की कमी को लेकर नन्हें जेन-अल्फा बच्चे खुद आंदोलित हो रहे हैं. मायावती ने उत्तर प्रदेश सहित अन्य राज्यों की सरकारों से अपील की कि वे जेन-अल्फा बच्चों की बेहतर शिक्षा संबंधी जरूरतों और मांगों पर सहानुभूति, सही नीयत और नीति के साथ तत्काल ध्यान दें और उनके खिलाफ बल प्रयोग से बचें.