लखनऊ. हाल ही में योगी सरकार ने मंत्रीमंडल का विस्तार किया था. 6 विधायकों ने मंत्री पद की शपथ ली. अब उनके विभाग का भी बंटवारा कर दिया गया है. हालांकि, शपथ लेने वाले 6 मंत्रियों के अलावा 2 और मंत्रियों को भी विभाग सौंप दिया गया है. भूपेंद्र चौधरी को MSME विभाग, मनोज पांडेय को खाद्य एवं रसद, अजीत सिंह पाल स्वतंत्रता प्रभार को खाद्य सुरक्षा और औषधि प्रशासन, सोमेंद्र तोमर, स्वतंत्र प्रभार को सैनिक कल्याण और प्रांतीय रक्षक दल को जिम्मेदारी दी गई है.

इनके अलावा कृष्णा पासवान राज्य मंत्री को पशुधन एवं दुग्ध विकास, कैलाश सिंह राजपूत राज्य मंत्री को ऊर्जा एवं अतिरिक्त ऊर्जा स्रोत, सुरेंद्र दिलेर राज्य मंत्री को राजस्व विभाग औऱ हंसराज विश्वकर्मा, राज्य मंत्री को सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग की जिम्मेदारी सौंपी गई है.

इन विधायकों ने ली थी मंत्री पद की शपथ

भूपेंद्र चौधरी:- जाट राजनीति और पश्चिम यूपी का सबसे बड़ा चेहरा माने जाते हैं. चौधरी पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद क्षेत्र से आते हैं. आम जन के बीच उनकी अच्छी खासी पकड़ है और योगी सरकार के पहले कार्यकाल में पंचायतीराज मंत्री की कमान संभाल चुके हैं. उन्होंने भाजपा प्रदेश अध्य़क्ष रहते संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. वर्तमान में भूपेंद्र चौधरी एमएलसी हैं और उनका कार्यकाल साल 2028 तक है.

कृष्णा पासवान:- दलित समाज का प्रतिनिधित्व करने वाली दलित कृष्णा पासवान को मंत्री पद सौंपा गया. सपा के पीडीए को टक्कर देने में पासवान की पहुंच और पहचान भाजपा को फायदा पहुंच सकती है. उनके मंत्री बनने से पूर्वांचल और मध्य यूपी में पासवान वोट बैंक को आसानी से साधा जा सकता है.

हंसराज विश्वकर्मा:- पूर्वांचल की ओबीसी वोटों को साधने के लिए हंसराज विश्वकर्मा भाजपा के सबसे बड़ा राजनीतिक चेहरा हो सकते हैं. उनकी गिनती भाजपा के प्रमुख ओबीसी नेताओं में होती है. जिनकी वाराणसी, चंदौली, भदोही और आसपास के जिलों में अच्छी खासी पकड़ है. विश्वकर्मा लंबे समय से संगठन में भी सक्रिय रहे हैं.

सुरेंद्र दिलेर:- मूल रूप से जाटव समाज से आने वाले खैर विधानसभा सीट के विधायक सुरेंद्र दिलेर को मंत्री पद की शपथ दिलाई गई थी. दिलेर राजनीतिक प्रष्ठभूमि वाले परिवार से ताल्लुक रखते हैं. उनके दादा किशन लाल दिलेर हाथरस लोकसभा सीट से चार बार सांसद रहे हैं. पश्चिमी यूपी में दलित राजनीति के लिहाज से उनका नाम काफी प्रभावशाली माना जाता है.

कैलाश सिंह राजपूत:- कैलाश राजपूत कन्नौज की तिर्वा से विधायक हैं, वो लोध बिरादरी से आते हैं. तिर्वा इलाका समाजवादी पार्टी का गढ़ माना जाता है.0 ऐसे में सपा का किला भेदने के लिए कैलाश राजपूत काफी अहम भूमिका निभा सकते हैं. उन्होंने 1996 में तिर्वा विधानसभा सीट से भाजपा उम्मीदवार के रूप में जीत हासिल की थी. इसके बाद वे बसपा चले गए और 2017 के विधानसभा चुनाव में फिर से भाजपा के साथ जुड़े.

मनोज पांडेय:- समाजवादी पार्टी की सरकार में मंत्री रह चुके हैं. मनोज पांडेय की गिनती प्रदेश के कद्दावर ब्राह्मण नेता के रूप में होती है. ब्राह्मण वोट को साधने और इनके जरिये सपा के वोटर्स में सेंध लगाने के लिए मंत्री पद दिया गया है. पांडेय ने लोकसभा चुनाव के दौरान समाजवादी पार्टी से दूरी बनाई और खुलकर भाजपा का समर्थन किया था.