रविंद्र कुमार भारद्वाज, रायबरेली. कांग्रेस सांसद और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के रायबरेली दौरे का पहला दिन बाढ़ पीड़ित ग्रामीणों के लिए निराशा भरा रहा. हैदरगढ़ मार्ग से रायबरेली पहुंचने के दौरान महराजगंज और शिवगढ़ तहसील क्षेत्र में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जगह-जगह उनका जोरदार स्वागत किया. कहीं फूल-मालाएं पहनाई गईं तो कहीं नारेबाजी और आतिशबाजी के बीच राहुल गांधी का अभिनंदन किया गया, लेकिन इसी स्वागत के शोर से कुछ ही दूरी पर बाढ़ प्रभावित गांवों के ग्रामीण अपनी समस्याएं बताने के लिए सांसद का इंतजार करते रह गए.
ग्रामीणों के अनुसार, मुख्य मार्ग से महज कुछ दूरी पर कई बाढ़ प्रभावित परिवार मौजूद थे. उन्हें उम्मीद थी कि रायबरेली सांसद काफिला रोककर उनकी परेशानी सुनेंगे और बाढ़ से हुए नुकसान का जायजा लेंगे. ग्रामीण घंटों तक सड़क की ओर देखते रहे, लेकिन काफिला बिना रुके आगे निकल गया. सांसद से मुलाकात न हो पाने के बाद ग्रामीणों में निराशा और नाराजगी साफ नजर आई.
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फूल-मालाओं के बीच छूट गए पीड़ित परिवार
राहुल गांधी के स्वागत के लिए कांग्रेस कार्यकर्ताओं में खासा उत्साह दिखाई दिया. कार्यकर्ता हाथों में झंडे लेकर नारे लगाते रहे और काफिले पर फूल बरसाते रहे. स्वागत के लिए सड़क किनारे भीड़ जुटी रही. दूसरी ओर, बाढ़ प्रभावित गांवों के लोग अपने बच्चों और परिवार के सदस्यों के साथ सांसद का इंतजार करते रहे. ग्रामीणों का कहना है कि वे किसी बड़े भाषण या राजनीतिक घोषणा की मांग नहीं कर रहे थे. उनकी सिर्फ इतनी उम्मीद थी कि सांसद कुछ मिनट रुककर उनकी स्थिति देख लें और उनकी समस्याएं सुन लें. ग्रामीणों के मुताबिक, बाढ़ के कारण खेतों में पानी भर गया है, फसलें बर्बाद हो चुकी हैं और कई परिवारों के सामने रोजमर्रा की जरूरतें जुटाना भी मुश्किल हो गया है.
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बाढ़, जलभराव और फसल बर्बादी से परेशान हैं लोग
महराजगंज और शिवगढ़ तहसील क्षेत्र के कई गांवों में बाढ़ और जलभराव ने ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. खेतों में पानी भरने से खरीफ की फसल को नुकसान पहुंचने की बात कही जा रही है. कई स्थानों पर ग्रामीणों को आवागमन में परेशानी हो रही है. कच्चे रास्ते खराब हो चुके हैं और गांवों तक राहत सामग्री पहुंचने में भी दिक्कतें आ रही हैं. ग्रामीणों का आरोप है कि बाढ़ के बाद उन्हें तत्काल राहत, खाद्य सामग्री, दवाइयों और मुआवजे की जरूरत है. कई परिवारों का कहना है कि प्रशासनिक टीमें गांवों तक पहुंच तो रही हैं, लेकिन समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं हो पा रहा है. ऐसे में उन्हें अपने सांसद से बड़ी उम्मीद थी.
सवालों के साथ लौटे ग्रामीण
राहुल गांधी के काफिले के न रुकने के बाद ग्रामीणों के बीच कई सवाल खड़े हो गए. ग्रामीणों का कहना है कि जब सांसद उनके गांव के इतने करीब से गुजर रहे थे, तब उन्हें अपनी समस्याएं बताने का अवसर क्यों नहीं दिया गया? क्या स्वागत करने वाले कार्यकर्ताओं से मिलना जरूरी था, लेकिन बाढ़ पीड़ितों से मिलना नहीं? कुछ ग्रामीणों ने कहा कि नेताओं के दौरे के दौरान अक्सर स्वागत और राजनीतिक कार्यक्रमों को प्राथमिकता मिलती है, जबकि वास्तविक समस्याओं से जूझ रहे लोगों की आवाज पीछे छूट जाती है. उनका कहना है कि बाढ़ का पानी भले ही धीरे-धीरे उतर जाए, लेकिन फसल और घर-परिवार को हुए नुकसान की भरपाई लंबे समय तक नहीं हो पाएगी.



