लखनऊ. उत्तर प्रदेश के जय प्रकाश नारायण सर्वोदय विद्यालयों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को अब स्कूली शिक्षा के साथ रोजगारपरक हुनर भी सिखाया जाएगा. उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन ने वित्तीय वर्ष 2026-27 में ‘प्रोजेक्ट प्रवीण’ के तहत कौशल प्रशिक्षण की तैयारी पूरी कर ली है. मिशन निदेशक पुलकित खरे के निर्देशन में 31 प्रशिक्षण प्रदाता संस्थाओं को 3 हजार से अधिक विद्यार्थियों को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य दिया गया है.
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अपैरल से IT-ITES तक प्रशिक्षण
इस पहल के तहत विद्यार्थियों को अपैरल, आईटी-आईटीईएस, मैनेजमेंट समेत विभिन्न रोजगारपरक सेक्टरों में प्रशिक्षण दिया जाएगा. इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को स्कूल स्तर पर ही व्यावसायिक कौशल से जोड़ना है, ताकि आगे की पढ़ाई के साथ उनके लिए रोजगार और बेहतर करियर के अवसर तैयार हो सकें.
एक बैच में अधिकतम 35 विद्यार्थी
कौशल प्रशिक्षण की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए एक बैच में अधिकतम 35 विद्यार्थियों को शामिल किया जाएगा. प्रशिक्षण की कुल अवधि 300 घंटे तक होगी. सभी चयनित प्रशिक्षण केंद्रों पर 30 सितंबर तक ट्रेनिंग शुरू करना अनिवार्य किया गया है.
प्रशिक्षण प्रदाताओं को केंद्र स्थापित करने, अनुमोदन कराने, विद्यार्थियों का पंजीकरण और बैच गठन की प्रक्रिया समय से पूरी करनी होगी. संबंधित बैच को मंजूरी देने से पहले NCVET और NQR पोर्टल पर जॉब रोल की जांच भी की जाएगी.
ट्रेनिंग के साथ मिलेगा जरूरी सामान
प्रशिक्षण शुरू होने के सात दिन के भीतर विद्यार्थियों को पाठ्य सामग्री उपलब्ध कराना अनिवार्य होगा. सामग्री वितरण की हस्ताक्षरित रसीद और तस्वीरें मिशन पोर्टल पर अपलोड करनी होंगी. प्रशिक्षण का पाठ्यक्रम और मूल्यांकन संबंधित सेक्टर स्किल काउंसिल के मानकों के अनुसार होगा.
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मिशन निदेशक पुलकित खरे ने कहा कि प्रोजेक्ट प्रवीण का लक्ष्य विद्यार्थियों को स्कूली शिक्षा के साथ हुनर में दक्ष बनाना है. उनके मुताबिक, स्कूल में ही कौशल प्रशिक्षण मिलने से छात्रों का आत्मविश्वास बढ़ेगा और वे भविष्य में रोजगार व बेहतर करियर के लिए अधिक सक्षम बनेंगे.



