UPI Payment New Rules: ऑनलाइन ट्रांजेक्शन को बढ़ावा देने वाली मोदी सरकार (Modi government) अब उसे सरकारी तिजोरी भरने का जरिया के रूप में इस्तेमाल करने जा रही है। जी हां…. मोदी सरकार यूपीआई पेमेंट के नियम में संशोधन करने जा रही है। इसके तहत 2000 रुपये से लेकर उससे अधिक के यूपीआई ट्रांजेक्शन (UPI Transaction) पर चार्ज लगेगा। मोदी सरकार ने संसद में नया विधेयक पेश किया है, जिसके तहत MDR चार्ज की वापसी हो रही है। इसके तहत 2000 रुपये के ऊपर पेमेंट पर चार्ज देना होगा।
वित्त मंत्रालय ने संसद में भुगतान और निपटान प्रणाली (संशोधन) विधेयक, 2027 पेश किया है। इस बिल के तहत मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू करने की बात कही गई है। यह चार्ज 2000 रुपये से ज्यादा की लिमिट पर लागू किया जा सकता है। इसका मतलब लोगों को MDR चार्ज देना होगा।
हालांकि राहत वाली बात यह है कि यह सभी लोगों पर लागू नहीं होगा। आम यूजर्स पर इसका कोई असर नहीं होगा। यह चार्ज सिर्फ बड़े व्यवसाय से जुड़े लोगों पर लगेगा। दूध, सब्जियां, किराने का सामान जैसी रोजमर्रा की खरीदारी और ऑटो रिक्शा व टैक्सी के किराए पर इसका असर पड़ने की संभावना नहीं है। मीडियो रिपोर्टस के मुताबिक यह प्रस्ताव मुख्य रूप से ₹2,000 से अधिक के व्यापारी लेनदेन और बड़े कमर्शियल संस्थानों को टारगेट करता है। इससे कंज्यूमर टू कंज्यूमर्स के बीच हुए ट्रांजेक्शन को छूट होगी। अगर आप 2000 रुपये से ज्यादा का भी पेमेंट करते हैं तो आपको कोई चार्ज नहीं देना होगा। सामान्य UPI सीमा ₹1 लाख प्रतिदिन पेमेंट कर सकते हैं और कुछ स्पेशल कैटेगरी (जैसे अस्पताल, शिक्षा, टैक्स) में इससे कहीं अधिक सीमा तक पेमेंट कर सकते हैं।

इन यूजर्स पर लागू होगा नियम
यह मुख्य तौर पर बैंक, UPI सर्विस प्रोवाइडर, मर्चेंट पेमेंट इकोसिस्टम, BHIM-UPI के माध्यम से छोटे भुगतान स्वीकार करने वाले व्यापारियों पर पड़ता है, क्योंकि इंसेंटिव इन्हीं ट्रांजेक्शनों के आधार पर दिया जाता है। एक आंकड़े के मुताबिक, 95 फीसदी 2000 रुपये से ज्यादा की लिमिट से कम वाले ही ट्रांजेक्शन होते हैं। सिर्फ 5 फीसदी ही ट्रांजेक्शन 2000 रुपये से ज्यादा का होता है। इसका मतलब है कि इन 5 फीसदी ही मर्चेंट ट्रांजेक्शन पर ये चार्ज लागू होगा।
कितना लगेगा चार्ज
रिपोर्ट के अनुसार, 2000 रुपये से ऊपर के व्यावसायिक लेन-देन पर प्रस्तावित शुल्क 0.25% से 0.4% तक हो सकता है, और 25-30 बेसिस पॉइंट्स तक के शुल्क पर भी चर्चा चल रही है। इसके लागू होने की समयसीमा पर अभी तक कोई फैसला नहीं लिया गया है।
क्या है MDR शुल्क
MDR एक ऐसा शुल्क है, जो व्यवसाय, डिजिटल लेनदेन करने के लिए बैंकों और भुगतान सेवा प्रदाताओं को देते हैं। इसलिए कोई भी शुल्क व्यापारियों पर लागू होगा, न कि UPI का उपयोग करने वाले उपभोक्ताओं पर। यह नियम जनवरी 2020 में शुरू होने वाला था। हालांकि मोदी सरकार ने डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए बैंकों और भुगतान सेवा प्रदाताओं को यूपीआई और रुपे डेबिट कार्ड लेनदेन पर MDR चार्ज लगाने से रोक दिया था।
कांग्रेस ने साधा निशाना
सरकार की इस योजना पर कांग्रेस ने निशाना साधा है। कांग्रेस ने सोशळ मीडिया एक्स पर लिखा- मोदी ने आपकी जेब काटने का प्लान बना लिया है। जल्द ही आपसे 2,000 रुपए से ज्यादा के UPI पेमेंट पर वसूली की जा सकती है। लोग पहले ही महंगाई से परेशान हैं, लेकिन नरेंद्र मोदी को उससे फर्क नहीं पड़ता। वो नए-नए प्लान लाकर आपकी पाई-पाई निचोड़ लेना चाहते हैं। मोदी का फंडा साफ है: जनता मरती रहे – वसूली चलती रहे
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