दुर्गेश राजपूत, नर्मदापुरम। एक तरफ सरकार जल सुरक्षा के लिए ‘सावधानी हटी, दुर्घटना घटी’ जैसे नारे बुलंद कर रही है, तो दूसरी तरफ कानून बनाने वाले ही इन नियमों को पानी में डुबोते नज़र आ रहे हैं। हाल ही में कश्मीर की मशहूर डल झील से एक ऐसा वीडियो सामने आया है जिसने सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है। शहरी विकास संसदीय समिति के सदस्य इन दिनों श्रीनगर के दौरे पर हैं। लेकिन चर्चा उनके काम की नहीं, बल्कि उनकी ‘लापरवाह बोटिंग’ की हो रही है। वायरल वीडियो में सांसद डल झील की लहरों के बीच बिना लाइफ जैकेट पहने शिकारे का लुत्फ उठाते दिख रहे हैं।
तस्वीरों में कई दिग्गज चेहरे बिना सुरक्षा कवच के कैद हुए हैं, जिनमें मगुंटा श्रीनिसुलु रेड्डी, माया नारोलिया (राज्यसभा सांसद), मेधा कुलकर्णी,सतपाल ब्रह्मचारी, राम शिरोमणि वर्मा शामिल है। हैरानी की बात यह है कि अभी कुछ समय पहले ही बरगी में क्रूज डूबने की खौफनाक घटना हुई थी। उस हादसे के जख्म अभी भरे भी नहीं थे कि जनप्रतिनिधियों की यह लापरवाही सामने आ गई।
कांग्रेस ने इस पर तीखा प्रहार करते हुए पूछा “क्या वीआईपी लोगों की जान को खतरा नहीं होता? सरकार एक तरफ जागरूकता अभियान चलाती है और दूसरी तरफ उनके अपने लोग ही नियमों की धज्जियाँ उड़ा रहे हैं।”
विवाद बढ़ता देख राज्यसभा सांसद माया नारोलिया की ओर से सफाई दी है। उनका कहना है कि “लाइफ जैकेट सबके पास थी, लेकिन शायद सिर्फ फोटो खिंचवाने के लिए उन्हें उतारा गया होगा। सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा गया था और बोट ओवरलोड नहीं थी।” अब सवाल यह उठता है कि क्या चंद सेकंड के ‘परफेक्ट फोटो’ के लिए जान जोखिम में डालना सही है? खासकर तब, जब आप लाखों लोगों के लिए रोल मॉडल है।
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