हेमंत शर्मा, इंदौर। नगर निगम की राजस्व वसूली व्यवस्था के सामने चेक बाउंस का मामला अब छोटी परेशानी नहीं, बल्कि बड़ा वित्तीय सिरदर्द बन गया है। करीब सवा साल में 3266 चेक बाउंस होने की जानकारी सामने आई है। इन चेकों की कुल राशि करीब 37 करोड़ रुपये बताई जा रही है। हैरानी की बात यह है कि इनमें बेहद छोटी रकम के चेक भी शामिल हैं। कुछ मामलों में तो 15-15 रुपये के चेक तक बाउंस हुए हैं। लगातार बढ़ते मामलों को देखते हुए अब बड़ा फैसला लिया है। निगम एक लाख रुपये से कम राशि के चेक स्वीकार नहीं करेगा। छोटे भुगतान के लिए अब ऑनलाइन, UPI, नकद और डिमांड ड्राफ्ट जैसे विकल्पों पर जोर दिया जाएगा।
3266 चेक बाउंस… 37 करोड़ रुपये का सवाल
नगर निगम में अलग-अलग कर और अन्य देनदारियों के भुगतान के लिए दिए गए चेक लगातार बाउंस हो रहे हैं। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, करीब सवा साल में 3266 चेक बाउंस हुए और इनकी राशि लगभग 37 करोड़ रुपये तक पहुंच गई। सिर्फ चालू वित्तीय वर्ष में 1 अप्रैल से 30 जून के बीच करीब 6.50 करोड़ रुपये के 566 चेक बाउंस होने की जानकारी है। वहीं पिछले वित्तीय वर्ष में करीब 31 करोड़ रुपये के लगभग 2700 चेक बाउंस हुए थे।आंकड़े साफ इशारा कर रहे हैं कि समस्या किसी एक व्यक्ति या एक-दो मामलों की नहीं है। निगम की राजस्व वसूली व्यवस्था में चेक के जरिए आने वाले भुगतान को लेकर बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।
15 रुपये का चेक भी नहीं बचा!
मामला तब और चौंकाने वाला हो जाता है जब चेक की रकम सामने आती है। कुछ लोगों ने निगम को महज 15-15 रुपये के चेक दिए और वे भी बाउंस हो गए। अब सवाल उठता है कि 15 रुपये की वसूली के लिए बैंक प्रक्रिया, चेक रिटर्न, संबंधित व्यक्ति से संपर्क और आगे की कार्रवाई में निगम का कितना समय और संसाधन खर्च होता होगा? यही वजह है कि निगम ने छोटे मूल्य के चेक से ही दूरी बनाने का फैसला किया है।
अब 1 लाख से कम के चेक की ‘नो एंट्री’
लगातार चेक बाउंस होने के बाद निगम ने अब एक लाख रुपये से कम राशि के चेक स्वीकार नहीं करने का निर्णय लिया है। छोटी रकम के भुगतान के लिए ऑनलाइन भुगतान, UPI, नकद और डिमांड ड्राफ्ट जैसे विकल्प उपलब्ध रहेंगे।निगम का उद्देश्य साफ है- भुगतान आए तो सीधे खाते में आए, बैंक से लौटकर दोबारा वसूली की नौबत न आए।
बाउंस होने के बाद भी रकम जमा नहीं, 250 मामले लंबित
चेक बाउंस होने के बाद सबसे बड़ी चुनौती उस रकम की वसूली है। जानकारी के मुताबिक, ऐसे करीब 250 मामले अभी लंबित हैं, जिनमें चेक बाउंस होने के बावजूद संबंधित लोगों ने राशि जमा नहीं की। कई मामलों में रिमाइंडर के बावजूद भुगतान नहीं होने की बात सामने आई है। ऐसे में निगम को अब लंबित रकम की वसूली के लिए अलग प्रक्रिया अपनानी पड़ रही है।
नेता प्रतिपक्ष ने किया विरोध, आयुक्त को लिखा पत्र
इंदौर नगर निगम में टैक्स जमा करने के लिए एक लाख रुपये से कम राशि के चेक स्वीकार नहीं करने के फैसले ने अब राजनीतिक रंग ले लिया है। नगर निगम की नेता प्रतिपक्ष सोनिला मिमरोट ने इस निर्णय का खुलकर विरोध किया है। सोनिला ने कहा कि ‘अधिकारियों की मनमानी पर लगाम जरूरी है लेकिन निर्वाचित परिषद के रहते अधिकारी अपने स्तर पर इतना बड़ा फैसला कैसे ले सकते हैं ? उन्होंने निगम आयुक्त को पत्र लिखकर फैसले पर सवाल उठाए हैं और इसे मनमाना आदेश बताया है।
Follow the LALLURAM.COM MP channel on WhatsApp
https://whatsapp.com/channel/0029Va6fzuULSmbeNxuA9j0m


