लालकिला कार धमाका साजिश (Red Fort Car Bombing Conspiracy) मामले में NIA ने बड़ा खुलासा किया है। जांच एजेंसी के अनुसार, इस साजिश में शामिल अलकायदा से जुड़े आतंकवादियों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीक का भी इस्तेमाल किया था। NIA सूत्रों के मुताबिक, आरोपियों ने रॉकेट इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (IED) भी तैयार किए थे। इनका परीक्षण जम्मू-कश्मीर के काजीगुंड (Kazigund) के जंगलों में किया गया था। जांच में सामने आया है कि साजिश को अंजाम देने के लिए तकनीक और आधुनिक संसाधनों का उपयोग किया गया। एजेंसी का कहना है कि आरोपियों ने विस्फोटक उपकरणों को अधिक प्रभावी बनाने और योजना तैयार करने में AI आधारित टूल्स की मदद ली। यह खुलासा NIA द्वारा 14 मई को अदालत में दायर आरोपपत्र (Chargesheet) में किया गया है। एजेंसी फिलहाल मामले में शामिल अन्य संदिग्धों और नेटवर्क की भी जांच कर रही है।

आरोपपत्र के मुताबिक, आतंकियों ने इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (IED) तैयार करने और उसके इस्तेमाल में लैब जैसी बारीकी और सफाई बरती। जांच में सामने आया है कि विस्फोटक उपकरणों को तकनीकी तरीके से तैयार किया गया था। एनआईए ने आरोपपत्र में अंसार नाम के आरोपी को भी नामजद किया है। जांच एजेंसी के अनुसार, अंसार गजवत-उल-हिंद आतंकी मॉड्यूल का इंजीनियर था और उसका संबंध अल-कायदा इन द इंडियन सबकॉन्टिनेंट (एक्यूआईएस) से था। गृह मंत्रालय पहले ही AQIS और उससे जुड़े सभी संगठनों को आतंकी संगठन घोषित कर चुका है। जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपियों ने जम्मू-कश्मीर के काजीगुंड के जंगलों में रॉकेट इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस का परीक्षण किया था।

धमाके में शामिल थे 3 डॉक्टर

एजेंसी द्वारा दायर आरोपपत्र के अनुसार, आरोपी जसीर बिलाल वानी वर्ष 2024-25 के दौरान अल फलाह यूनिवर्सिटी (Al-Falah University) कैंपस में 2-3 बार रुका था। जसीर वहां साजिश के लिए तकनीकी मदद देने के उद्देश्य से ठहरा था। विश्वविद्यालय से जुड़े 3 डॉक्टर कथित तौर पर धमाके की साजिश में शामिल थे। इस खुलासे के बाद यूनिवर्सिटी की भूमिका भी जांच के दायरे में आ गई है। जसीर बिलाल वानी को डॉ. अदील अहमद राथर ने मुख्य आरोपी डॉ. उमर उन नबी से मिलवाया था। NIA के अनुसार, उमर उन नबी इस पूरे मॉड्यूल का मुख्य आरोपी था और कथित तौर पर आतंकी गतिविधियों के संचालन में अहम भूमिका निभा रहा था।

Youtube से सीखा बम बनाना

जांच में सामने आया कि आरोपी जसीर ने यूट्यूब और AI आधारित प्लेटफॉर्म की मदद से रॉकेट इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (IED) बनाने और विस्फोटक मिश्रण के अनुपात से जुड़ी जानकारी जुटाई थी। आरोपपत्र के अनुसार, उसने तकनीकी जानकारी ऑनलाइन माध्यमों से हासिल कर उसे साजिश में इस्तेमाल किया। एनआईए के मुताबिक, अदील ने जसीर को IED तैयार करने के लिए जरूरी सामग्री उपलब्ध कराई थी। वहीं, मुख्य आरोपी डॉ. उमर उन नबी ने इम्प्रोवाइज्ड रॉकेट IED बनाने के तरीके बताए और तकनीकी मार्गदर्शन दिया।

एजेंसी द्वारा दायर आरोपपत्र के अनुसार, आरोपी कश्मीर और देश के अन्य हिस्सों में सुरक्षा प्रतिष्ठानों पर ड्रोन के जरिए विस्फोटक हमले की साजिश रच रहे थे। जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने सिलेंडर आधारित इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (IED) का भी परीक्षण किया था। NIA के मुताबिक, मॉड्यूल हाईटेक तरीके से विस्फोटक उपकरण तैयार कर रहा था और इसके लिए ऑनलाइन माध्यमों व आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया गया।

आरोपपत्र के अनुसार, आरोपी जसीर ने E-कॉमर्स प्लेटफॉर्म  के जरिए सेंसर, आरएफ ट्रांसमीटर, सोल्डरिंग किट और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण मंगवाए थे। जांच एजेंसी का कहना है कि इन सामानों का इस्तेमाल IED ट्रिगर सिस्टम तैयार करने में किया गया। इन खरीदों का खर्च मुख्य आरोपी डॉ. उमर उन नबी ने उठाया था। एनआईए ने आरोपपत्र में कहा है कि इस मामले ने चिकित्सा पेशे से जुड़े कथित “व्हाइट कॉलर मॉड्यूल” का खुलासा किया है। जांच में यह भी पुष्टि हुई है कि आरोपियों ने टीएटीपी (TATP) विस्फोटक का इस्तेमाल किया था, जिसे अत्यधिक संवेदनशील और खतरनाक विस्फोटक माना जाता है।

जंगलों में किए गए IED परीक्षण

NIA के अनुसार, आरोपी जसीर के खुलासे के बाद जांच टीम ने जंगलों में तलाशी अभियान चलाया, जहां से विस्फोटक उपकरणों के अवशेष बरामद किए गए। एजेंसी ने इन अवशेषों को मामले में महत्वपूर्ण साक्ष्य के तौर पर जब्त किया है। जांच में यह भी सामने आया कि मुख्य आरोपी डॉ. उमर उन नबी ने जसीर को 2 ड्रोन उपलब्ध कराए थे। आरोपियों को इन ड्रोन की उड़ान सीमा और भार क्षमता बढ़ाने के निर्देश दिए गए थे, ताकि उनका इस्तेमाल विस्फोटक हमलों में किया जा सके। मॉड्यूल सुरक्षा प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने की साजिश पर काम कर रहा था। आरोपियों ने AI आधारित प्लेटफॉर्म, ऑनलाइन वीडियो और आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की मदद से हाईटेक IED और ड्रोन आधारित हमले की तैयारी की थी।

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