Dharm Desk: घर का शयनकक्ष केवल आराम करने की जगह नहीं है, बल्कि यह पति-पत्नी के रिश्ते को मानसिक सुकून देने में भी अहम भूमिका निभाता है। वास्तु के अनुसार यदि कमरे का माहौल या उसकी व्यवस्था सही न हो तो बिना वजह चिड़चिड़ापन और आपसी रिश्तों में कड़वाहट बढ़ने लगती है। शादी के बाद वैवाहिक जीवन में स्थिरता और मिठास बनाए रखने के लिए दक्षिण-पश्चिम दिशा में बना शयनकक्ष सबसे अनुकूल माना गया है। यह दिशा रिश्तों में आपसी समझ और मजबूती लाती है।

इन बातों पर ध्यान देना जरूरी है

  1. जिस कक्ष में पर्याप्त प्राकृतिक धूप और ताजी हवा नहीं आती, वहां नकारात्मक ऊर्जा जमा होने लगती है। ऐसे कक्ष में सोने से मन भारी और अशांत रहता है।
  2. पलंग के आसपास इतनी जगह खाली रखें कि चलने-फिरने में कोई परेशानी न हो। बेडरूम में बहुत ज्यादा अव्यवस्था होने से मन में अकारण तनाव बढ़ता रहता है।
  3. सोते समय हमेशा दक्षिण दिशा की तरफ सिर करके सोएं। उत्तर दिशा की ओर सिर करके सोने से नींद प्रभावित होती है और सिरदर्द या थकान की समस्या हो सकती है।

शयनकक्ष में ये चीजें न रखें

पति-पत्नी जिस कमरे में सोते हैं, उसमें कुछ नियमों के पालन के साथ-साथ इन बातों का भी ध्यान देना जरूरी है कि वहां कुछ ऐसी चीज न रखी हो, जिससे दोनों के रिश्तों में तनाव बने।

टूटे-फूटे सामान या तिड़के हुए कांच तुरंत बाहर निकाल दें।

कमरे में इलेक्ट्रॉनिक्स सामान का ढेर न लगाएं। न ही फालतू कबाड़ जमा होने दें।

सिरहाने के पास फालतू का सामान न रखें। इससे मन भटकता रहता है।

रिश्तों की नींव आपसी समझ, खुलकर बात करने और एक-दूसरे के सम्मान पर टिकी होती है।

वास्तु से मिलने वाले सुझाव घर में एक हल्का और खुशनुमा माहौल तैयार करने में मदद करते हैं, जिससे बातचीत का रास्ता आसान हो जाता है।

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