अनुराग शर्मा, सीहोर। जिला अस्पताल इन दिनों अपनी बदइंतजामी और लचर स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर एक बार फिर सुर्खियों में है। ताजा मामला स्वास्थ्य विभाग की रीढ़ कही जाने वाली ‘108 आपातकालीन एंबुलेंस सेवा’ से जुड़ा है, जो खुद इस कदर बीमार हो चुकी है कि अब उसे राहगीरों के धक्के की जरूरत पड़ रही है।
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जिस एंबुलेंस पर गंभीर मरीजों की जिंदगी बचाने और उन्हें समय पर अस्पताल पहुंचाने की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है, वह अब खुद वेंटिलेटर पर पहुंच रही है। सीहोर जिला अस्पताल परिसर और राष्ट्रीय राजमार्ग पर राहगीरों द्वारा एंबुलेंस को धक्का मारते हुए देखना अब आम बात हो चुकी है। सोशल मीडिया पर भी इसके वीडियो और तस्वीरें वायरल हो रही हैं, जो जिला प्रशासन के दावों की पोल खोल रही हैं।
जिम्मेदार कौन? वेंडर कंपनी या स्वास्थ्य विभाग?
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा और गंभीर सवाल यह उठता है कि अगर रास्ते में एंबुलेंस बंद होने के कारण किसी गंभीर मरीज की जान चली जाती है तो उसका जिम्मेदार आखिर कौन होगा? जानकारी के मुताबिक 108 एंबुलेंस सेवा का संचालन एक निजी अनुबंधित कंपनी द्वारा किया जाता है। गाड़ियों की समय पर सर्विसिंग न होना, पुरानी और खराब बैटरियों को न बदलना और मेंटेनेंस में लापरवाही बरतना इस बदहाली का मुख्य कारण है। वहीं स्थानीय स्वास्थ्य प्रशासन और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी द्वारा इसकी नियमित मॉनिटरिंग न किए जाने से वेंडर कंपनी के हौसले बुलंद हैं।
मरीजों की जान से खिलवाड़ कब तक?
आपातकालीन सेवाओं में चंद मिनटों की देरी भी मरीज के लिए जानलेवा साबित हो सकती है। एंबुलेंस को धक्का लगाने की ये तस्वीरें न सिर्फ स्वास्थ्य विभाग को शर्मसार कर रही हैं, बल्कि यह भी दिखाती हैं कि आम जनता का जीवन यहां कितने बड़े जोखिम में है।
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अब देखना यह होगा कि इस खबर के सामने आने के बाद जिला प्रशासन और राज्य स्वास्थ्य विभाग संबंधित वेंडर कंपनी पर क्या ठोस कार्रवाई करता है, या फिर सीहोर के मरीज इसी तरह भगवान भरोसे धक्के खाते रहेंगे।

