बलवंत भट्ट, मंदसौर। मध्यप्रदेश और राजस्थान की सीमा पर बसे धतुरिया क्षेत्र में सिस्टम की लापरवाही ग्रामीणों की जान पर भारी पड़ रही है। चंबल नदी इस समय खतरनाक रूप ले रही है, लेकिन मजबूरी ऐसी कि लोग अपनी जान हथेली पर रखकर उफनती लहरों के बीच से नदी पार करने को मजबूर हैं।
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दरअसल, साल 2019 में आई भीषण बाढ़ में इस क्षेत्र की मुख्य पुलिया बह गई थी। तब से लेकर आज तक, यानी पिछले 5 सालों से ग्रामीण एक अदद सुरक्षित रास्ते के लिए तरस रहे हैं। वर्तमान में शिप्रा नदी का पानी चंबल में छोड़े जाने से जलस्तर लगातार बढ़ रहा है, जिससे स्थिति और भी भयावह हो गई है।
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ग्रामीणों का कहना है कि पहले ऐसी स्थिति नहीं थी। यहां पर एक पुल हुआ करता था जो साल 2019 में आई बाढ़ में बह गया। उसके बाद से अब तक यहां दोबारा पुल नहीं बना है। ग्रामीणों का कहना है कि अधिकारियों से इस बारे में कई बार बात की गई। अधिकारियों के द्वारा सिर्फ आश्वासन ही हमे मिलता आ रहा है, लेकिन पुल का निर्माण नहीं हो सका है। फिलहाल प्रशासन ने मौके पर पहुंचकर आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया है लेकिन यह कब पूरा होगा इसका निर्णय अभी नहीं हुआ है।
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