कुमार इंदर, जबलपुर। मध्यप्रदेश के जबलपुर शहपुरा पुलिस द्वारा शराब तस्करी के एक आरोपी को सरकारी वाहन के बजाय चमचमाती प्राइवेट कार से वीआईपी अंदाज में कोर्ट ले जाने का मामला उजागर हुआ है। कोर्ट परिसर से आरोपी का काफिला निकलने और उसके साथियों द्वारा वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल करने के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए दो पुलिसकर्मियों के खिलाफ जांच शुरू कर दी गई है।

प्राइवेट कार से पाटन कोर्ट ले जाया गया

दरअसल शहपुरा पुलिस ने पिछले दिनों शराब तस्करी के मामले में आरोपी आकाश पटेल को गिरफ्तार किया था। नियमानुसार आरोपी को पुलिस की गाड़ी या सुरक्षित सरकारी माध्यम से न्यायालय में पेश किया जाना था। लेकिन, आरोपी के रसूख और रसूखदारों से कनेक्शन के चलते ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों ने नियमों को ताक पर रख दिया। आरोपी आकाश पटेल को एक प्राइवेट कार से पाटन कोर्ट ले जाया गया। इस कार में न केवल पुलिसकर्मी बल्कि आरोपी के अन्य साथी भी वीआईपी की तरह सवार थे।

रसूख दिखाने के चक्कर में फंसे

जब आरोपी का यह ‘प्राइवेट कार काफिला’ पाटन कोर्ट से बाहर निकला, तो उसके हौसले बुलंद थे। रसूख का प्रदर्शन करने के लिए आरोपी के साथियों ने ही इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो बना लिया और उसे सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। वीडियो सामने आते ही पुलिस की कार्यप्रणाली और अपराधियों को मिलने वाली ‘खास सुविधाओं’ पर तीखे सवाल उठने लगे। वीडियो वायरल होने के बाद वरिष्ठ अधिकारियों ने मामले का संज्ञान लिया। शुरुआती जांच में सामने आया है कि आरोपी को यह अवैध वीआईपी सुविधा उसके रसूख के चलते दी गई थी।

हवलदार और सिपाही से जवाब-तलब

इस बड़ी लापरवाही को लेकर पाटन थाने में पदस्थ दो पुलिसकर्मियों पर गाज गिरी है। मामले में हवलदार जयंत और सिपाही ताराचंद की भूमिका संदिग्ध पाई गई है, जिनसे अब जवाब-तलब किया गया है। दोनों पुलिसकर्मियों के खिलाफ विभागीय जांच शुरू कर दी गई है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वायरल वीडियो के हर पहलू की बारीकी से जांच की जा रही है और दोषी पाए जाने पर संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

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