​बिहार में नीट (NEET) यूजी री-एग्जाम और पेपर लीक मामलों को लेकर आर्थिक अपराध इकाई (EOU) ने बड़ी कार्रवाई की है। EOU की टीम ने पटना में परीक्षा केंद्र के बाहर से मास्टरमाइंड डॉक्टर समेत तीन शातिर आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह पूरा गैंग प्रतियोगी परीक्षाओं में सॉल्वर (स्कॉलर्स) बैठाने का काम करता था और इसके तार कई मेडिकल कॉलेजों से जुड़े हुए पाए गए हैं।

​मुख्य सरगना और गिरफ्तार आरोपियों की पहचान

​EOU द्वारा गिरफ्तार किए गए मुख्य आरोपियों में डॉ. रवि शंकर उर्फ सम्राट, उसका बड़ा भाई अश्विनी कुमार और डॉ. उज्जवल राज शामिल हैं। मुख्य सरगना डॉ. रवि शंकर नालंदा के पावापुरी स्थित महावीर इंस्टीट्यूट में एमबीबीएस फाइनल ईयर का छात्र है, जबकि डॉ. उज्जवल राज भी इसी संस्थान से जुड़ा हुआ है। ये सभी पटना में आर्यभट्ट नॉलेज यूनिवर्सिटी के बाहर परीक्षा के दौरान पकड़े गए। जांच एजेंसियों के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपियों के पास से विभिन्न परीक्षाओं की खाली बुकलेट, मूल प्रमाण पत्र, ब्लैंक चेक, और करीब दो लाख रुपए नकद बरामद किए गए हैं।
​12 से 30 लाख रुपए तक की होती थी भारी-भरकम डील
​यह गिरोह प्रतियोगी परीक्षाओं में पास कराने के नाम पर अभ्यर्थियों से मोटी रकम वसूलता था। शुरुआती जांच में सामने आया है कि किसी भी परीक्षा में असली उम्मीदवार की जगह फर्जी स्कॉलर बैठाने के एवज में 12 से 30 लाख रुपए की डील होती थी। इसके अलावा, इस सिंडिकेट ने आर्यभट्ट नॉलेज यूनिवर्सिटी की एमबीबीएस परीक्षा में भी बड़े पैमाने पर सेंधमारी और सेटिंग की थी।

​लग्जरी गाड़ियों का होता था इस्तेमाल और पुराने आपराधिक इतिहास

​जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि मास्टरमाइंड के बड़े भाई अश्विनी कुमार के नाम पर एक टाटा हैरियर लग्जरी गाड़ी रजिस्टर्ड है। इसी गाड़ी का इस्तेमाल स्कॉलर्स को एक जगह से दूसरी जगह लाने-ले जाने के लिए किया जाता था। मुख्य सरगना रवि शंकर का आपराधिक इतिहास भी रहा है, जो पहले रेलवे ग्रुप-डी भर्ती परीक्षा में धांधली के मामले में भी मास्टरमाइंड रह चुका है। वहीं, उसकी पत्नी मधु प्रिया पर भी फर्जी कैंडिडेट के रूप में परीक्षा देने का आरोप है, हालांकि गर्भावस्था के कारण फिलहाल उसकी गिरफ्तारी पर रोक लगी हुई है। EOU अब इस रैकेट से जुड़े बिहार के अन्य मेडिकल, नर्सिंग और डेंटल कॉलेजों के संदिग्धों को नोटिस भेजने की तैयारी कर रही है।