ड्रग्स तस्करी के एक बड़े नेटवर्क से जुड़े आरोपी वीरेंद्र सिंह बसोया को दुबई से भारत वापस लाया गया है। NCB के मुताबिक, बसोया पुणे के करीब 6,000 करोड़ रुपये के कथित ड्रग्स केस में वांछित था और उसके खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया गया था। भारत सरकार की पहल के बाद UAE से उसके डिपोर्टेशन की कार्रवाई पूरी हुई।

अमित शाह ने बताया बड़ी कामयाबी

गृह मंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए कार्रवाई की जानकारी साझा करते हुए कहा कि मोदी सरकार विदेशों में छिपे ड्रग तस्करों का लगातार पता लगा रही है। उन्होंने कहा कि सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत नशीले पदार्थों के पूरे नेटवर्क को खत्म करने की दिशा में एजेंसियां लगातार काम कर रही हैं।

970 किलो मेफेड्रोन बरामदगी से जुड़ा मामला

NCB के दस्तावेजों के अनुसार, जांच में वीरेंद्र बसोया का संबंध एक बड़े अवैध ड्रग्स नेटवर्क से सामने आया है। आरोप है कि नेटवर्क के जरिए मेफेड्रोन की बड़ी खेप लंदन भेजने की साजिश रची गई थी।

21 फरवरी 2024 को पुणे पुलिस ने दिल्ली में कार्रवाई करते हुए दिवेश चरंजीत भूतानी और संदीपकुमार राजपाल बैसोया को गिरफ्तार किया था। उनके कब्जे से करीब 970 किलो मेफेड्रोन बरामद होने का दावा किया गया। जांच में आरोप सामने आया कि दोनों आरोपी कथित तौर पर वीरेंद्र सिंह बसोया के निर्देश पर काम कर रहे थे।

लॉजिस्टिक्स कंपनी के जरिए भेजी जानी थी खेप

जांच एजेंसियों के मुताबिक, मेफेड्रोन को विदेश भेजने के लिए डेल्टा लॉजिस्टिक्स के जरिए कंसाइनमेंट तैयार किया जा रहा था। कंपनी से जुड़े संदीप हनुमानसिंह यादव और देवेंद्र रामफुल यादव को भी इस मामले में गिरफ्तार किया गया था।

बेटे के खिलाफ भी रेड कॉर्नर नोटिस

जांच के दौरान वीरेंद्र बसोया के बेटे ऋषभ का नाम भी सामने आया है। उसके खिलाफ भी रेड कॉर्नर नोटिस जारी होने की जानकारी है और वह फिलहाल विदेश में बताया जा रहा है।

बसोया की भारत वापसी को अंतरराष्ट्रीय ड्रग नेटवर्क के खिलाफ भारतीय जांच एजेंसियों की अहम कार्रवाई माना जा रहा है। हालांकि, मामले में लगाए गए आरोपों का अंतिम निर्धारण अदालत की कार्यवाही के बाद ही होगा।

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