चंडीगढ़: हरियाणा में शहरों से निकलने वाले कचरे को अब बिजली उत्पादन के लिए इस्तेमाल करने की तैयारी है। राज्य सरकार ने चार बड़े वेस्ट-टू-एनर्जी प्रोजेक्ट के लिए एमओयू साइन किए हैं। ये प्लांट हिसार, अंबाला, फरीदाबाद और गुरुग्राम क्लस्टर में लगाए जाएंगे। परियोजनाओं के पूरी तरह शुरू होने पर रोजाना करीब 5 हजार टन कचरे का प्रसंस्करण किया जाएगा और इससे लगभग 50 मेगावाट बिजली पैदा करने का लक्ष्य है।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने नूंह में एमओयू कार्यक्रम के बाद कहा कि सरकार की कोशिश कचरे को केवल निपटाने की नहीं, बल्कि उससे उपयोगी संसाधन तैयार करने की है। उन्होंने कहा कि बढ़ते शहरीकरण के साथ कचरा प्रबंधन बड़ी चुनौती बन रहा है। ऐसे में आधुनिक तकनीक के जरिए कचरे को ऊर्जा में बदलना ‘वेस्ट टू वेल्थ’ की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
गुरुग्राम में सबसे बड़ा प्लांट
चारों परियोजनाओं में सबसे ज्यादा क्षमता वाला संयंत्र गुरुग्राम क्लस्टर में प्रस्तावित है। यहां प्रतिदिन 2 हजार टन कचरे को प्रोसेस किया जाएगा और करीब 20 मेगावाट बिजली उत्पादन की उम्मीद है।
फरीदाबाद क्लस्टर में रोजाना 1,600 टन कचरे का प्रसंस्करण होगा। इससे न्यूनतम 16 मेगावाट ऊर्जा पैदा करने का लक्ष्य है।
अंबाला क्लस्टर में प्रतिदिन 900 टन कचरे को प्रोसेस किया जाएगा और यहां से कम से कम 9 मेगावाट ऊर्जा उत्पादन अपेक्षित है। इस क्लस्टर में अंबाला के साथ यमुनानगर और पंचकूला के शहरी निकाय भी शामिल होंगे।
वहीं हिसार क्लस्टर में रोजाना 500 टन कचरे का प्रसंस्करण होगा। यहां हिसार, हांसी, फतेहाबाद और जींद के शहरी स्थानीय निकाय शामिल हैं। इस प्लांट से कम से कम 5 मेगावाट ऊर्जा पैदा होने की उम्मीद है।
गीले और सूखे कचरे की अलग-अलग प्रोसेसिंग
सरकार के मुताबिक इन प्लांटों में हर तरह के कचरे को एक साथ जलाने के बजाय उसकी प्रकृति के अनुसार प्रोसेस किया जाएगा। पहले कचरे की छंटाई और पूर्व-प्रसंस्करण होगा। गीले कचरे से कंप्रेस्ड बायोगैस तैयार करने की व्यवस्था होगी, जबकि ऐसे सूखे कचरे को ऊर्जा उत्पादन के लिए इस्तेमाल किया जाएगा जिसे दोबारा उपयोग या रिसाइकिल नहीं किया जा सकता।
सरकार का कहना है कि परियोजनाओं में पर्यावरणीय मानकों का ध्यान रखा जाएगा और कचरे के वैज्ञानिक निपटान पर जोर रहेगा।
केंद्र से लेकर कंपनी तक की हिस्सेदारी
इन परियोजनाओं को केंद्र सरकार के अर्बन चैलेंज फंड से वित्तीय सहायता मिलने की योजना है। कुल पूंजीगत लागत में 25 प्रतिशत हिस्सा केंद्र सरकार देगी। 25 प्रतिशत राशि हरियाणा सरकार और संबंधित शहरी स्थानीय निकाय मिलकर लगाएंगे। बाकी 50 प्रतिशत निवेश ऑयल ग्रीन एनर्जी लिमिटेड करेगी, जो ऑयल इंडिया लिमिटेड की पूर्ण स्वामित्व वाली कंपनी है।
अक्टूबर 2028 तक शुरू होने का लक्ष्य
मुख्यमंत्री के मुताबिक चारों संयंत्रों को अक्टूबर 2028 तक शुरू करने की उम्मीद है। इनके संचालन में आने के बाद हर दिन हजारों टन शहरी कचरे का वैज्ञानिक तरीके से इस्तेमाल होगा और उसी से बिजली भी तैयार होगी।
सरकार इसे शहरों में कचरा प्रबंधन की व्यवस्था बदलने वाली पहल के तौर पर देख रही है। यदि परियोजनाएं तय समय पर जमीन पर उतरती हैं, तो हरियाणा में कचरे के निपटान के साथ ऊर्जा उत्पादन का एक नया मॉडल तैयार हो सकता है।
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