दिल्ली में जारी जल संकट के बीच मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता (Rekha Gupta) के एक बयान को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। सोशल मीडिया पर उनका करीब 12 सेकेंड का एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें वह पानी की कमी के कारणों पर बात करती नजर आ रही हैं। वीडियो में मुख्यमंत्री पानी के इवैपोरेशन (वाष्पीकरण) का जिक्र करती दिखाई देती हैं, जिसके बाद विपक्ष ने उन पर निशाना साधना शुरू कर दिया है।आम आदमी पार्टी ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा करते हुए तंज कसा कि मुख्यमंत्री दिल्ली में पानी की कमी के लिए सूरज को जिम्मेदार ठहरा रही हैं। पार्टी ने वायरल वीडियो को आधार बनाकर सरकार की जल प्रबंधन नीति पर सवाल उठाए हैं।
हालांकि, मुख्यमंत्री के पूरे बयान को लेकर भाजपा नेताओं का कहना है कि उनके बयान को संदर्भ से काटकर पेश किया जा रहा है। भाजपा का दावा है कि रेखा गुप्ता ने केवल वाष्पीकरण का उल्लेख नहीं किया था, बल्कि पानी की लीकेज, वितरण व्यवस्था में खामियों और जल संरक्षण की चुनौतियों पर भी विस्तार से बात की थी। भारतीय जनता पार्टी ने विपक्ष पर आरोप लगाया है कि वह मुख्यमंत्री के बयान के एक छोटे हिस्से को वायरल कर लोगों को गुमराह करने की कोशिश कर रहा है। भाजपा नेताओं का कहना है कि जल संकट के कई कारण हैं और सरकार विभिन्न स्तरों पर समस्या के समाधान के लिए काम कर रही है।
क्या था पूरा बयान
दरअसल, रेखा गुप्ता ने अपने बयान में कहा था, “पानी की कितनी दिक्कत हो रही है। आजकल के समय में जब इतनी गर्मी पड़ रही है, पानी हमारा जो आता है वह इवैपोरेट हो जाता है, जिसके कारण कमी होती है। कुछ लीकेज हो जाती है तो उसके चलते शॉर्टेज हो जाता है। मैंने तुरंत हरियाणा के मुख्यमंत्री को फोन किया और उन्होंने कहा कि हम आपको एक्स्ट्रा पानी देंगे ताकि दिल्ली को पानी की कमी न हो।” मुख्यमंत्री के इस बयान का एक छोटा हिस्सा सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद विपक्षी दल आम आदमी पार्टी ने उन पर तंज कसा। पार्टी ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री पानी की कमी के लिए वाष्पीकरण को जिम्मेदार ठहरा रही हैं और सरकार वास्तविक समस्याओं से ध्यान भटका रही है।
क्यों दिल्ली में हो रही पानी की कमी?
रेखा गुप्ता ने अपने बयान में केवल वाष्पीकरण (इवैपोरेशन) का ही जिक्र नहीं किया था, बल्कि पानी की लीकेज को भी जल संकट की एक बड़ी वजह बताया था। जल आपूर्ति प्रणाली में होने वाली इस लीकेज को तकनीकी भाषा में ट्रांसमिशन लॉस कहा जाता है। पानी के स्रोत से उपभोक्ताओं तक पहुंचने के दौरान पाइपलाइन में रिसाव, खराब ढांचा और वितरण संबंधी खामियों के कारण बड़ी मात्रा में पानी नष्ट हो जाता है, जिससे आपूर्ति प्रभावित होती है। मुख्यमंत्री ने कहा था कि भीषण गर्मी के दौरान वाष्पीकरण के कारण भी पानी की उपलब्धता प्रभावित होती है, जबकि लीकेज और अन्य तकनीकी समस्याओं के चलते पानी की कमी और बढ़ जाती है। उन्होंने यह भी बताया था कि अतिरिक्त पानी की व्यवस्था के लिए उन्होंने हरियाणा सरकार से संपर्क किया है।
दिल्ली की जल आपूर्ति काफी हद तक पड़ोसी राज्यों पर निर्भर है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, राजधानी को मिलने वाले कुल पानी का लगभग 61 प्रतिशत हिस्सा हरियाणा से, करीब 25 प्रतिशत हिस्सा उत्तर प्रदेश से प्राप्त होता है, जबकि शेष जरूरत भूजल और अन्य स्थानीय स्रोतों से पूरी की जाती है। ऐसे में बाहरी राज्यों से मिलने वाली जल आपूर्ति में किसी भी प्रकार की कमी या वितरण व्यवस्था में गड़बड़ी का सीधा असर दिल्ली के लाखों लोगों पर पड़ता है।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता द्वारा हरियाणा से अतिरिक्त पानी की मांग किए जाने और मुनक नहर से 55 क्यूसेक अतिरिक्त पानी छोड़े जाने के बावजूद राजधानी को कोई बड़ी राहत नहीं मिल पाई है। जानकारों के अनुसार, दिल्ली में सामान्य दिनों में पानी की कुल मांग करीब 1250 एमजीडी (मिलियन गैलन प्रतिदिन) रहती है, जबकि वास्तविक आपूर्ति लगभग 1002 एमजीडी ही हो पाती है। यानी सामान्य परिस्थितियों में भी मांग और उपलब्धता के बीच बड़ा अंतर बना रहता है। स्थिति तब और गंभीर हो जाती है जब गर्मियों में पानी की खपत बढ़ जाती है। भीषण गर्मी के मौजूदा दौर में दिल्ली को मिलने वाली जल आपूर्ति घटकर लगभग 904 से 905 एमजीडी तक पहुंच गई है। ऐसे में कई इलाकों में पानी की कमी और आपूर्ति संबंधी समस्याएं बढ़ने लगी हैं।
दिल्ली अपनी जल जरूरतों के लिए काफी हद तक पड़ोसी राज्यों पर निर्भर है। राजधानी को मिलने वाले कुल पानी का बड़ा हिस्सा हरियाणा और उत्तर प्रदेश से आता है। ऐसे में आपूर्ति में मामूली कमी या तकनीकी बाधा का असर सीधे लाखों उपभोक्ताओं पर पड़ता है। वर्तमान स्थिति पर नजर डालें तो दिल्ली में यमुना नदी का प्राकृतिक प्रवाह लगभग पूरी तरह सूख चुका है। ऐसे में राजधानी की जल आपूर्ति मुख्य रूप से हरियाणा से आने वाले पानी पर निर्भर है। हरियाणा से पानी दिल्ली तक पहुंचाने के दो प्रमुख माध्यम हैं हथनीकुंड बैराज और मुनक नहर।
अधिकारियों के अनुसार, मुनक नहर की वहन क्षमता और मार्ग सीमित होने के कारण उससे आने वाला अतिरिक्त पानी दिल्ली की पूरी जरूरत को पूरा नहीं कर पाता। वहीं हथनीकुंड बैराज से छोड़ा गया पानी भी रास्ते में होने वाले ट्रांसमिशन लॉस के कारण पूरी मात्रा में राजधानी तक नहीं पहुंच पाता। जल विभाग के अधिकारियों का कहना है कि रास्ते में होने वाले नुकसान के चलते बड़ी मात्रा में पानी वजीराबाद तक पहुंचने से पहले ही कम हो जाता है। अनुमान है कि लगभग 200 से 225 क्यूसेक पानी दिल्ली के वजीराबाद बैराज तक नहीं पहुंच पाता। यही कारण है कि अतिरिक्त पानी छोड़े जाने के बावजूद राजधानी में जल संकट बना हुआ है।
दिल्ली की कुल पानी की मांग करीब 1250 एमजीडी (मिलियन गैलन प्रतिदिन) बताई जाती है, जबकि सामान्य परिस्थितियों में भी आपूर्ति लगभग 1002 एमजीडी रहती है। भीषण गर्मी के मौजूदा दौर में यह उपलब्धता घटकर करीब 904-905 एमजीडी तक पहुंच गई है, जिससे कई इलाकों में पानी की किल्लत बढ़ गई है। अधिकारियों का मानना है कि जब तक ट्रांसमिशन लॉस को कम नहीं किया जाता और दिल्ली तक अतिरिक्त 200-225 क्यूसेक पानी प्रभावी रूप से नहीं पहुंचता, तब तक राजधानी को जल संकट से पूरी तरह राहत मिलना मुश्किल होगा।
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