शशांक द्विवेदी, खजुराहो। मध्य प्रदेश में ‘हर घर जल’ और बुनियादी विकास के बड़े-बड़े दावों को आईना दिखाती एक बेहद दर्दनाक तस्वीर छतरपुर जिले से सामने आई है। यहां राजनगर जनपद के एक गांव में पेयजल संकट इस कदर गहरा गया है कि ग्रामीणों को अपनी प्यास बुझाने के लिए रोज डर के साये में श्मशान घाट और कब्रिस्तान जाना पड़ रहा है।
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नेशनल हाईवे के किनारे बसे गांव में बूंद-बूंद को तरस रहे लोग
यह पूरा मामला राजनगर जनपद क्षेत्र की शिवराजपुर ग्राम पंचायत के अंतर्गत आने वाले रामशिला टेक गांव का है। हैरानी की बात यह है कि यह गांव छतरपुर-पन्ना नेशनल हाईवे-39 के बिल्कुल किनारे बसा हुआ है। भीषण गर्मी के चलते गांव के पारंपरिक जलस्रोत पूरी तरह सूख चुके हैं और गांव के पास लगे हैंडपंप भी खराब पड़े हैं। पानी की बूंद-बूंद के लिए मोहताज महिलाएं, मासूम बच्चे और बुजुर्ग रोजाना करीब 1 किलोमीटर दूर श्मशान घाट और कब्रिस्तान के पास बने जल स्रोत से पानी ढोने को मजबूर हैं।

किताबों की जगह बच्चों के हाथों में पानी के डिब्बे
गांव की इस त्रासदी ने बच्चों का बचपन भी छीन लिया है। जहां इस उम्र में बच्चों को स्कूल जाना चाहिए और हाथों में किताबें होनी चाहिए, वहीं वे सुबह से ही सिर और हाथों में पानी के बर्तन व डिब्बे उठाए नजर आते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यह समस्या कोई नई नहीं है, बल्कि हर साल गर्मी में उन्हें इसी तरह नरकीय जीवन जीना पड़ता है।

दो पंचायतों की ‘प्रशासनिक उलझन’ में पिसे ग्रामीण
रामशिला टेक गांव के इस संकट के पीछे एक बड़ी वजह प्रशासनिक लापरवाही भी है। यह गांव दो ग्राम पंचायतों के बीच फंसा हुआ है। गांव के एक तरफ चंद्रनगर ग्राम पंचायत की सीमा लगती है तो दूसरी तरफ शिवराजपुर ग्राम पंचायत की। ग्रामीणों का आरोप है कि दोनों ही पंचायतें इसे अपने क्षेत्र से बाहर का बताकर पल्ला झाड़ लेती हैं और इसी उलझन का खामियाजा यहां की जनता भुगत रही है।
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जिम्मेदार बोले- जल्द होगा समाधान
इस गंभीर मामले पर चंद्रनगर ग्राम पंचायत के सचिव संजय पाठक ने माना कि रामशिला टेक में पेयजल की भारी किल्लत है और लोग कब्रिस्तान के पास से पानी ला रहे हैं। वहीं, राजनगर जनपद पंचायत के सीईओ राकेश शुक्ला ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आश्वासन दिया है कि जल्द ही तकनीकी टीम भेजकर गांव में पेयजल व्यवस्था सुधारी जाएगी।


