भिवानी जिले के पालुवास गांव में रसूखदारों द्वारा मुख्य पाइपलाइन पर अवैध मोटरें लगाकर पानी चोरी करने का भंडाफोड़ हुआ है। विभाग ने सख्त कार्रवाई करते हुए एफआईआर दर्ज कराने की चेतावनी दी है।

अजय सैनी, भिवानी। पिछले पांच महीने से भिवानी जिले में पेयजल के लिए हाहाकार मचा है और कुछ लोग रसूख के दम पर न केवल पानी की चोरी कर रहे हैं, बल्कि लोगों के हक पर डाका भी डाल रहे हैं। इसका बड़ा उदाहरण गांव पालुवास में पीने के पानी से बाग की सिंचाई करते एक मामले को माना जा सकता है। सरकार और जन स्वास्थ्य विभाग जल जीवन मिशन के तहत हर घर नल और नल से स्वच्छ जल के संकल्प को पूरा करने के लिए जी-जान से जुटा है। लेकिन धरातल पर कुछ लोगों की लापरवाही और स्वार्थी रवैया इस महत्वाकांक्षी योजना को पलीता लगा रहा है। ऐसा ही एक गंभीर मामला गांव पालुवास से सामने आया है, जहां पीने के साफ पानी का इस्तेमाल घरों की प्यास बुझाने के बजाय अवैध रूप से फलों के बाग सींचने के लिए किया जा रहा था। इस वजह से पूरी गली के लोग पानी की एक-एक बूंद को तरस रहे थे। बार-बार मिल रही शिकायतों के बाद शुक्रवार सुबह जन स्वास्थ्य विभाग की टीम ने बिना किसी पूर्व सूचना के गांव में औचक छापेमारी की, जिसमें कई चौंकाने वाले खुलासे हुए।

मुख्य लाइन पर अवैध मोटरें

ग्रामीणों की शिकायत थी कि जलापूर्ति का समय बढ़ाए जाने के बावजूद उनके घरों तक पानी नहीं पहुंच रहा है। समस्या की जड़ का पता लगाने के लिए जन स्वास्थ्य विभाग के जूनियर इंजीनियर (जेई) बिजेश कुमार जावला विभागीय कर्मचारियों और स्थानीय निवासियों के साथ तड़के ही प्रभावित गली में पहुंच गए। जांच के दौरान सामने आया कि कई घरों में नियमों को ताक पर रखकर एक से ज्यादा कनेक्शन लिए गए थे। हद तो तब हो गई जब अधिकारियों ने देखा कि लोगों ने सीधे मुख्य पाइपलाइन पर दो-दो टुल्लू पंप लगा रखे थे। इससे भी बड़ा खुलासा एक ही गली में स्थित तीन खाली प्लॉटों को देखने पर हुआ। इन तीनों प्लॉटों में रसूखदारों ने फलों के बड़े-बड़े बाग लगा रखे हैं। स्थानीय निवासियों ने बताया जैसे ही गली में सरकारी पानी की सप्लाई शुरू होती है, इन प्लॉटों का मालिक आता है और तीनों प्लॉटों की मोटरें एक साथ चालू करके चला जाता है। जब तक पानी की सप्लाई बंद नहीं होती, तब तक ये मोटरें सीधे लाइन से पानी खींचकर बागों को सींचती रहती हैं। इसके बाद वह आकर इन्हें बंद करता है। इस वजह से हमारे घरों के नलों में हवा तक नहीं आती।

दोषियों पर होगी सख्त एफआईआर

इस अवैध कृत्य और पानी की खुलेआम चोरी को देखते हुए जन स्वास्थ्य विभाग सख्त रुख अपना रहा है। जन स्वास्थ्य विभाग के जूनियर इंजीनियर (जेई) बिजेश कुमार जावला ने कहा कि इस मामले में संलिप्त लोगों को तुरंत नोटिस जारी किया जा रहा है। यदि इसके बाद भी उन्होंने अपनी आदत नहीं सुधारी, तो न केवल उनकी मोटरें जब्त की जाएंगी, बल्कि उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराकर कानूनी कार्रवाई भी अमल में लाई जाएगी। उन्होंने कहा कि आमतौर पर लोग पानी न आने का दोष विभाग पर मढ़ देते हैं, लेकिन अमूमन इसके पीछे की मुख्य वजह अवैध मोटरों का इस्तेमाल होती है। जन स्वास्थ्य विभाग के नियमों के अनुसार कोई भी उपभोक्ता सरकारी पानी की मुख्य पाइपलाइन पर सीधे मोटर नहीं लगा सकता, यह पूरी तरह गैर-कानूनी है। पानी लेने की सही प्रक्रिया यह है कि उपभोक्ता को अपने घर में एक अंडरग्राउंड टैंक बनाना चाहिए। विभाग की लाइन से पानी बिना किसी मोटर के प्राकृतिक दबाव से सीधे उस अंडरग्राउंड टैंक में गिरना चाहिए। इसके बाद उपभोक्ता उस टैंक से पंप चलाकर अपने घर की छत पर रखी पानी की टंकी को भर सकता है।