पाकिस्तानी सांसद मौलाना फजलुर रहमान ने सेना प्रमुख आसिम मुनीर पर कार्यप्रणाली और दावों को लेकर तीखा हमला किया है. जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम के प्रमुख फजल-उर-रहमान ने पेशावर और अन्य मंचों पर दिए गए बयानों में 1971 के युद्ध का हवाला देते हुए पाकिस्तानी फौज के नेतृत्व को आड़े हाथों लेते हुए मौजूदा हालात पर बयान दिया है. सेना को भी राजनीति से दूर रहना चाहिए और देश की सुरक्षा का ध्यान रखना चाहिए. पाकिस्तान के मौजूदा सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर की इज्जत की धज्जियां उड़ा दी.

पाकिस्तान में नेशनल असेंबली के सदस्य फजल-उर-रहमान ने एक कार्यक्रम के दौरान देश की सेना और उसके नेतृत्व पर सवाल उठाया.

पाकिस्तान के सांसद मौलाना फजलुर रहमान ने शहबाज शरीफ सरकार और असीम मुनीर के सैन्य नेतृत्व पर कड़ा हमला बोला है. 1971 के युद्ध की घटना याद करते हुए कहा कि उस समय भी पाकिस्तान की ओर से बड़े-बड़े दावे किए थे. उन्होंने पाकिस्तानी सेना पर कटाक्ष करते हुए कहा कि 1971 में आत्मसमर्पण करने से एक दिन पहले जनरल याह्या खान ने राष्ट्र को संबोधित करते हुए कहा था कि हम लड़ेंगे, लेकिन ठीक अगले ही दिन उन्होंने अपने हथियार डाल दिए.

फजलुर रहमान ने कहा कि पाकिस्तान की सेना का झूठ बोलने का एक इतिहास रहा है. सिर्फ बयानबाजी की जा रही है. रविवार को पेशावर में कार्यकर्ता सम्मेलन में फजलुर रहमान ने ये बातें कही हैं.

पाकिस्तान के सीनियर राजनेताओं में शुमार मौलाना फजलुर रहमान ने देश की आंतरिक सुरक्षा को लेकर सैन्य नेतृत्व और इस्लामाबाद की सत्ता को निशाने पर लिया है. उन्होंने सवाल किया है कि जब आम लोग दर्द और परेशानियों से गुजर रहे हैं तो ऐसे समय में जश्न मनाने का क्या मतलब है.

मौलाना फजलुर रहमान ने असीम मुनीर पर कटाक्ष करतेहुए कहा कि अगर एक राजनीतिक कार्यकर्ता के तौर पर मुझे सैन्य संस्थान में दखल देने का कोई अधिकार नहीं है तो सेना को भी राजनीति में दखल देने का कोई अधिकार नहीं होना चाहिए. सेना को भी राजनीति से दूर रहना चाहिए और देश की सुरक्षा का ध्यान रखना चाहिए.

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