TMC Rajya Sabha MP Prakash Chik Baraik Resigned: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हार के बाद से ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) और उनकी पार्टी टीएमसी अपने अबतक के सबसे बुरे दौर से गुजर रही है। चुनाव में मिली हार के बाद राज्य की सत्ता से बाहर हुई ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी ताश के पत्ते की तरह बिखरती जा रही है। ममता बनर्जी की पार्टी में इस्तीफों की झड़ी लगी हुई है। टीएमसी का एक और विकेट गिर गया है। तृणमूल कांग्रेस के राज्यसभा सांसद प्रकाश चिक बाराइक ने इस्तीफा दे दिया है। वे जल्द ही राज्यसभा अध्यक्ष से मिलकर अपना इस्तीफा सौंपेंगे।
अब तक तीन राज्यसभा सांसद पार्टी छोड़ चुके हैं। इससे पहले राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव और शुखेंदु शेखर रॉय तृणमूल कांग्रेस और अपने पद से इस्तीफा दे चुके हैं। बाराइक के इस्तीफे के बाद टीएमसी के राज्यसभा में 10 सांसद रह जाएंगे। बता दें कि राज्यसभा में टीएमसी में 13 सांसद थे। आने वाले दिनों टीएमसी और राज्यसभा सांसद इस्तीफा दे सकते हैं।

अपने त्यागपत्र में प्रकाश चिक ने लिखा- मैं राज्यसभा की मेंबरशिप से इस्तीफ़ा देता हूँ, जिसे तुरंत स्वीकार किया जाए। मैं आपके महामहिम, माननीय डिप्टी चेयरमैन और राज्य सभा सेक्रेटेरिएट के सभी अधिकारियों का दिल से शुक्रिया अदा करता हूँ, जिन्होंने राज्य सभा के मेंबर के तौर पर मेरे समय के दौरान मुझे हर तरह की मदद और सहयोग दिया।
राज्यसभा के इन सांसदों ने भी दिया इस्तीफा
बता दें कि बंगाल विधानसभा चुनाव में बीजेपी के हाथों मिली करारी शिकस्त के बाद ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी खंड-खंड हो रही है। एक तरफ 20 लोकसभा सांसदों ने बागी होकर अलग गुट बना लिया है। वहीं दूसरी तरफ राज्यसभा सांसदों का इस्तीफा भी जारी है। राज्यसभा सांसद प्रकाश चिक बाराइक से पहले सुष्मिता देव और सुखेंदु शेखर राय इस्तीफा दे चुके हैं। सबस पहले 8 जून को टीएमसी के राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर राय ने इस्तीफा दिया था। इसके 48 घंटे बाद यानी 10 जून को दीदी की करीबी राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव ने इस्तीफा दे दिया है। साथ ही सुष्मिता देव ने पार्टी से भी इस्तीफा दिया था।
टीएमसी में ऐसे शुरू हुआ बगावत का सिलसिला
बता दें कि बंगाल विधानसभा चुनाव में हार के बाद से ममता बनर्जी और उनकी पार्टी टीएमसी अपने अबतक के सबसे बुरे दौर से गुजर रही है। चुनाव में मिली हार के बाद राज्य की सत्ता से बाहर हुई ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी ताश के पत्ते की तरह बिखरती जा रही है। बंगाल चुनाव में बीजेपी से बुरी तरह हारने के बाद ममता बनर्जी और उनकी पार्टी को विधानसभा और संसद में भीतरी बगावत का सामना करना पड़ रहा है। टीएमसी चीफ ममता बनर्जी को हर दिन नये झटके लग रहे हैं। तृणमूल कांग्रेस में बगावत का दौर रितब्रता बनर्जी (Ritabrata Banerjee) और संदीपन साहा (Sandipan Saha) के निष्कासन के बाद शुरू हुआ था। पार्टी विरोध गतिविधियों के चलते ममता ने इन दोनों नेताओं को पार्टी से बाहर कर दिया था। इसके बाद ऋतब्रत बनर्जी बागी होकर अपने साथ 58 विधायक ले गए और विपक्ष के नेता बन गए। हालांकि, ये सभी विधायक टीएमसी में ही हैं।
इसके बाद लोकसभा और राज्यसभा के सांसदों ने बगावत कर दी। द टीएमसी के 20 सांसदों ने बगावत करते हुए अलग गुट बना लिया है। टीएमसी के कुल 28 लोकसभा सांसदों में से 20 सांसद एक अलग गुट बनाकर बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए सरकार को समर्थन करने का फैसला किया है। वहीं बागी सांसदों ने काकोली घोष (Kakoli Ghosh) को अपना चीफ व्हिप चुना है। काकोली घोष के साथ सायोनी घोष, शत्रुघ्न सिन्हा, यूसुफ पठान शताब्दी रॉय, बापी हलदर, अरूप चक्रवर्ती, जून मालिया, दीपक अधिकारी (देव), कालीपदा सरेन, जगदीश बसुनिया, असित मल, अबू ताहिर खान, खलीकुर रहमान, शर्मिला सरकार, प्रसून बनर्जी और पार्थ भौमिक हैं।
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