दिल्ली हाई कोर्ट (Delhi High Court)ने डॉक्टर कपिल कक्कड़ द्वारा सोशल मीडिया (Social Media) पर अपलोड किए गए कुछ वीडियो को हटाने का आदेश दिया है। इन वीडियो में उन्होंने एक मौजूदा हाई कोर्ट के जज पर 30 मई को हुए साकेत बिल्डिंग हादसे के लिए जिम्मेदार होने का आरोप लगाया था, जिसमें 6 लोगों की मौत हो गई थी। इस मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने माना कि सोशल मीडिया पर न्यायाधीशों के खिलाफ इस तरह के आरोप गंभीर प्रकृति के हैं और उनकी सत्यता का परीक्षण उचित कानूनी प्रक्रिया के तहत ही किया जाना चाहिए। इसी आधार पर कोर्ट ने संबंधित वीडियो को हटाने के निर्देश जारी किए।
यह आदेश निर्देश दिल्ली हाई कोर्ट की अवकाशकालीन पीठ ने दिया, जिसमें जस्टिस नीना बंसल कृष्णा और जस्टिस मधु जैन शामिल थीं। यह निर्देश दिल्ली हाई कोर्ट बार एसोसिएशन (DHCBA) की ओर से दायर आपराधिक अवमानना याचिका पर सुनवाई के दौरान दिए गए। बार एसोसिएशन ने अदालत को मामले की जानकारी देते हुए कार्रवाई की मांग की थी।
बार एसोसिएशन ने क्या कहा?
मामले की सुनवाई के दौरान Delhi High Court Bar Association (DHCBA) की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता एन. हरिहरन ने अदालत को बताया कि 8 जून को दिए गए आदेश के बावजूद आरोपी ने नए वीडियो पोस्ट किए। उन्होंने कहा कि इन नए वीडियो में फिर से न्यायपालिका और संबंधित जज के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए गए हैं। इसके अलावा, यह भी बताया गया कि आरोपी ने लोगों से अपने दूसरे सोशल मीडिया अकाउंट को फॉलो करने और आर्थिक सहायता देने की अपील की।
नए वीडियो सामने आने के बाद हाई कोर्ट ने सोशल मीडिया के दुरुपयोग को लेकर गंभीर चिंता जताई है। अदालत में कहा गया कि सोशल मीडिया से जुड़े मामलों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है और कई मामलों में पहले ही सख्त कार्रवाई करते हुए दोषियों को जेल तक भेजा गया है। अदालत ने यह भी संकेत दिया कि केवल सख्ती या नरमी की बहस से आगे बढ़कर ऐसे मामलों में प्रभावी नियंत्रण और जवाबदेही तय करने की जरूरत है। सुनवाई के दौरान यह भी माना गया कि बार-बार होने वाली ऐसी घटनाएं न्यायिक प्रक्रिया और सामाजिक व्यवस्था दोनों के लिए चुनौती बनती जा रही हैं, जिस पर गंभीरता से विचार किया जाना आवश्यक है।
क्या है मामला
दिल्ली हाई कोर्ट ने 8 जून को एक मामले में कक्कड़ के उन वीडियो और सोशल मीडिया पोस्ट को हटाने का आदेश दिया था, जिनमें एक मौजूदा हाईकोर्ट जज के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए गए थे। अदालत ने उनके एक्स, मेटा और यूट्यूब अकाउंट को ब्लॉक करने का निर्देश भी दिया था। यह आदेश दिल्ली हाई कोर्ट बार एसोसिएशन की ओर से दायर आपराधिक अवमानना याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया गया। याचिका में आरोप लगाया गया कि कक्कड़ ने न्यायपालिका और एक मौजूदा न्यायाधीश के खिलाफ अपमानजनक और भ्रामक टिप्पणियां कीं, जिससे न्यायपालिका की प्रतिष्ठा और जनता के विश्वास को नुकसान पहुंचा। बार एसोसिएशन का कहना है कि कक्कड़ ने एक न्यायिक आदेश को गलत तरीके से प्रस्तुत करते हुए जज पर भ्रष्टाचार और मिलीभगत के आरोप लगाए, जबकि संबंधित याचिका को केवल तकनीकी कारणों से वापस लेने की अनुमति दी गई थी। याचिका में यह भी कहा गया है कि बाद के वीडियो में भी उन्होंने न्यायपालिका के खिलाफ इसी तरह के आरोप जारी रखे।
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