दिल्ली उच्च न्यायालय (Delhi High Court) ने पिछले वर्ष अगस्त में CM रेखा गुप्ता (Rekha Gupta) पर कथित हमले के मामले में आरोपियों को बड़ी राहत देने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही पर रोक लगाने की मांग को खारिज कर दिया। यह फैसला जस्टिस अनूप जयराम भंभानी ने सुनाया। मामले में आरोपी सकरिया राजेशभाई खिमजीभाई और तहसीन रजा की ओर से ट्रायल पर रोक लगाने की याचिका दायर की गई थी, जिसे अदालत ने स्वीकार नहीं किया। इस फैसले के बाद अब मामले की सुनवाई ट्रायल कोर्ट में आगे जारी रहेगी।

मामले की सुनवाई जस्टिस अनूप जयराम भंभानी की अदालत में हुई, जहां आरोपियों की याचिका खारिज कर दी गई। आरोपियों सकरिया राजेशभाई खिमजीभाई और तहसीन रजा की ओर से ट्रायल पर रोक लगाने की मांग की गई थी, जिसे अदालत ने स्वीकार नहीं किया। वकील के मुताबिक, मामले की अगली सुनवाई 20 अप्रैल को होनी है, जब सबूत पेश किए जाने शुरू होंगे। ट्रायल कोर्ट पहले ही मेडिकल चीफ, MLC तैयार करने वाले डॉक्टर और रेखा गुप्ता के पर्सनल सिक्योरिटी ऑफिसर (PSO) को गवाही के लिए तलब कर चुका है।

क्या कर रहे थे दिल्ली में?

सुनवाई के दौरान जस्टिस अनूप जयराम भंभानी ने कहा कि अदालत किसी भी कार्यवाही पर तब तक रोक नहीं लगाती जब तक यह स्पष्ट न हो कि उससे कोई गलत या अनहोनी स्थिति पैदा होगी। कोर्ट ने कहा कि फिलहाल उसे ऐसा कोई आधार नजर नहीं आता। इसके साथ ही अदालत ने आरोपियों सकरिया राजेशभाई खिमजीभाई और तहसीन रजा की मौजूदगी पर सवाल उठाते हुए पूछा कि जब दोनों दिल्ली के निवासी नहीं हैं तो वे मुख्यमंत्री की “जन सुनवाई” में क्यों मौजूद थे।

आगे की सुनवाई 21 मई को होगी

सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी कहा कि आम तौर पर टैक्सी या ऑटो चालक जैसे लोग अपनी रोज़ी-रोटी के लिए हर दिन काम करते हैं और सैकड़ों किलोमीटर दूर किसी गतिविधि या विरोध में शामिल होने के लिए अपना काम नहीं छोड़ते। कोर्ट ने इस संदर्भ में आरोपियों की परिस्थितियों पर सवाल उठाए। मामले में अदालत ने फिलहाल ट्रायल पर रोक लगाने से इनकार करते हुए आगे की सुनवाई की तारीख 21 मई तय की है।

पिछले साल हुआ था CM पर हमला

दिल्ली उच्च न्यायालय में यह सुनवाई उस याचिका से जुड़ी थी, जिसमें आरोपियों सकरिया राजेशभाई खिमजीभाई और तहसीन रजा ने ट्रायल कोर्ट द्वारा उनके खिलाफ आरोप तय किए जाने के आदेश को चुनौती दी थी। यह मामला रेखा गुप्ता पर कथित हमले से जुड़ा है, जो 20 अगस्त 2025 को उनके सिविल लाइंस कैंप ऑफिस में आयोजित एक जन सुनवाई के दौरान हुआ था। इस केस में ट्रायल कोर्ट ने पिछले वर्ष दिसंबर में आरोपियों के खिलाफ गंभीर धाराएं तय की थीं, जिनमें हत्या के प्रयास, आपराधिक साजिश और एक सरकारी कर्मचारी पर हमला शामिल हैं।

आरोपियों के मोबाइल की होगी फोरेंसिक जांच

सुनवाई के बाद जस्टिस अनूप जयराम भंभानी ने रोहिणी स्थित फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) को निर्देश दिया है कि वह दोनों आरोपियों सकरिया राजेशभाई खिमजीभाई और तहसीन रजा के मोबाइल फोन की जांच करे और चार सप्ताह के भीतर अपनी रिपोर्ट अदालत में पेश करे। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वह यह पता लगाना चाहता है कि दोनों आरोपियों के बीच कोई आपसी संबंध या संपर्क था या नहीं। सुनवाई के दौरान जस्टिस भंभानी ने कहा कि एक आरोपी दिल्ली का निवासी नहीं है और दूसरा जन सुनवाई में शामिल था, इसलिए यह समझना जरूरी है कि उनके बीच कोई कनेक्शन है या नहीं। अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि मोबाइल फोन की सामग्री मामले की जांच में महत्वपूर्ण हो सकती है, इसलिए डिजिटल साक्ष्यों की गहन जांच आवश्यक है।

Follow the LALLURAM.COM MP channel on WhatsApp
https://whatsapp.com/channel/0029Va6fzuULSmbeNxuA9j0m