Technology Desk : आज स्मार्टफोन सिर्फ कॉल और मैसेज करने का साधन नहीं रह गया है। बैंकिंग, ऑनलाइन खरीदारी, पढ़ाई, काम, सोशल मीडिया और मनोरंजन जैसी कई जरूरी चीजें अब फोन के जरिए ही होती हैं। ऐसे में फोन बदलने का फैसला सोच-समझकर करना चाहिए। बाजार में नया मॉडल आने का मतलब यह नहीं है कि आपका मौजूदा फोन तुरंत बदलने लायक हो गया है।

अगर स्मार्टफोन अच्छी स्थिति में है और सही तरीके से काम कर रहा है, तो उसे कई साल तक इस्तेमाल किया जा सकता है। हालांकि, समय के साथ फोन के कुछ हिस्सों में खराबी आने लगती है। बैटरी की क्षमता कम हो सकती है, स्क्रीन टूट सकती है या फोन गिरने के कारण अंदर के पार्ट्स को नुकसान पहुंच सकता है। ऐसी कई समस्याओं को नया फोन खरीदने के बजाय रिपेयर कराकर ठीक किया जा सकता है।
बैटरी जल्दी खत्म हो रही है तो तुरंत फोन न बदलें
पुराने स्मार्टफोन में सबसे आम समस्या बैटरी की होती है। कुछ समय इस्तेमाल करने के बाद बैटरी पहले की तरह चार्ज नहीं रख पाती। फोन पहले की तुलना में जल्दी डिस्चार्ज होने लगता है और बार-बार चार्ज करना पड़ता है।
ऐसी स्थिति में पूरा फोन बदलना जरूरी नहीं है। अगर बाकी फोन ठीक काम कर रहा है, तो उसकी बैटरी बदली जा सकती है। नई बैटरी लगने के बाद फोन को लंबे समय तक दोबारा इस्तेमाल किया जा सकता है। इसी तरह फोन की स्क्रीन टूटने, चार्जिंग पोर्ट में खराबी आने या किसी दूसरे पार्ट में समस्या होने पर भी पहले रिपेयर का विकल्प देखना बेहतर हो सकता है।
फोन गिरने से अंदर के पार्ट्स को हो सकता है नुकसान
स्मार्टफोन गिरने के बाद हर नुकसान बाहर से दिखाई नहीं देता। कई बार फोन की स्क्रीन या बॉडी पर ज्यादा निशान नहीं होते, लेकिन गिरने की वजह से अंदर के किसी पार्ट को नुकसान पहुंच सकता है।
ऐसे फोन में बाद में अचानक हैंग होने, कैमरा खराब होने, नेटवर्क की समस्या या चार्जिंग से जुड़ी दिक्कत जैसी परेशानियां आ सकती हैं। अगर फोन गिरने के बाद लगातार असामान्य व्यवहार कर रहा है, तो उसे सर्विस सेंटर पर चेक करवाना उपयोगी हो सकता है।
सिक्योरिटी अपडेट बंद होना सबसे अहम संकेत
पुराने स्मार्टफोन को लेकर सबसे बड़ी चिंता सिर्फ हार्डवेयर की नहीं होती। फोन में बैंकिंग ऐप, ईमेल, निजी फोटो, चैट और दूसरी महत्वपूर्ण जानकारी रहती है। इसलिए फोन का सुरक्षित रहना भी जरूरी है।
कंपनियां हर स्मार्टफोन मॉडल को हमेशा के लिए ऑपरेटिंग सिस्टम और सिक्योरिटी अपडेट नहीं देतीं। कुछ साल बाद किसी मॉडल के लिए अपडेट बंद हो सकते हैं। ऐसे में फोन भले ही सामान्य रूप से चल रहा हो, लेकिन सुरक्षा के लिहाज से वह पहले जितना भरोसेमंद नहीं रह सकता। अगर आपके फोन को लंबे समय से सिक्योरिटी अपडेट नहीं मिल रहे हैं और कंपनी ने उस मॉडल के लिए सपोर्ट खत्म कर दिया है, तो फोन बदलने पर विचार किया जा सकता है।
पुराने फोन के पार्ट्स मिलना भी हो सकता है मुश्किल
स्मार्टफोन के पुराने होने के साथ उसकी मरम्मत से जुड़ी एक और समस्या सामने आ सकती है। समय बीतने पर पुराने मॉडल की बैटरी, स्क्रीन और दूसरे रिप्लेसमेंट पार्ट्स बाजार में कम उपलब्ध हो सकते हैं।
अगर किसी पार्ट को बदलने की जरूरत पड़ती है और वह आसानी से उपलब्ध नहीं है, तो रिपेयर महंगा हो सकता है। कई बार पुराने मॉडल की मरम्मत पर होने वाला खर्च नए और बेहतर फोन की कीमत के मुकाबले ज्यादा भी पड़ सकता है। ऐसी स्थिति में नया स्मार्टफोन खरीदना ज्यादा व्यावहारिक विकल्प हो सकता है।
फोन की कोई तय एक्सपायरी डेट नहीं होती
स्मार्टफोन की कोई ऐसी तय एक्सपायरी डेट नहीं होती, जिसके बाद उसे इस्तेमाल करना बंद करना जरूरी हो। फोन कितने साल चलेगा, यह उसकी क्वालिटी, इस्तेमाल, बैटरी की स्थिति, हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर सपोर्ट पर निर्भर करता है।
अगर फोन ठीक से चल रहा है, बैटरी जरूरत के मुताबिक काम कर रही है और उसे नियमित सिक्योरिटी अपडेट मिल रहे हैं, तो केवल नया मॉडल बाजार में आने की वजह से फोन बदलने की जरूरत नहीं है।
वहीं, अगर फोन की बैटरी कमजोर हो गई है लेकिन उसे बदला जा सकता है, स्क्रीन टूट गई है लेकिन रिपेयर संभव है या कोई दूसरा पार्ट खराब है जिसे आसानी से बदला जा सकता है, तो नया फोन खरीदने से पहले मरम्मत का विकल्प देखा जा सकता है।
कब फोन बदलने पर गंभीरता से विचार करें?
फोन बदलने का फैसला करते समय कुछ बातों पर खास ध्यान देना चाहिए। अगर फोन को सिक्योरिटी अपडेट मिलना बंद हो गया है, जरूरी ऐप्स नए सॉफ्टवेयर वर्जन पर ठीक से काम नहीं कर रहे हैं या फोन बार-बार हैंग और क्रैश हो रहा है, तो नया फोन लेने की जरूरत बढ़ सकती है।
इसके अलावा अगर बैटरी बदलना, स्क्रीन रिपेयर करना या दूसरे पार्ट्स बदलना बहुत महंगा पड़ रहा है और पुराने फोन के पार्ट्स भी आसानी से उपलब्ध नहीं हैं, तो रिपेयर के बजाय फोन बदलना ज्यादा सही विकल्प हो सकता है।
इस तरह फोन की उम्र के बजाय उसकी मौजूदा स्थिति, सॉफ्टवेयर सपोर्ट, सुरक्षा, रिपेयर की लागत और रोजमर्रा के इस्तेमाल में उसकी विश्वसनीयता को देखकर फैसला किया जा सकता है।

