अविनाश श्रीवास्तव, सासाराम। रोहतास जिले के डेहरी के बालरति बिगहा दहाउर गांव की एक महिला, जिसे पुलिस और उसके अपने ही परिवार द्वारा 12 साल पहले मृत घोषित कर दिया गया था और जिसके नाम पर उसके पति सहित कई लोग जेल की सजा भी काट चुके हैं, वह झारखंड के गढ़वा जिले से जिंदा बरामद हुई है। इस खुलासे के बाद से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है और पुलिस-प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
क्या था पूरा मामला
यह अजीबोगरीब घटना अगस्त 2014 की है। बालरति बिगहा गांव की रहने वाली सरस्वती देवी अपने एक रिश्ते के देवर के साथ अचानक घर से गायब हो गई थी। इसके कुछ दिनों बाद, 22 अगस्त 2014 को मुफस्सिल थाना क्षेत्र के खंडा गांव के पास एक नहर से अज्ञात महिला का शव बरामद हुआ। मृतका के भाई ने मौके पर पहुंचकर उस शव की पहचान अपनी बहन सरस्वती देवी के रूप में की। इसके बाद मृतका के भाई के बयान पर पति अरुण मेहता, ससुर दिलीप मेहता और जेठ गोविंद कुमार सहित आठ लोगों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कराया गया। गांव के चौकीदार ने भी शव की पहचान की पुष्टि की थी, जिसके आधार पर पुलिस ने पोस्टमार्टम कराया और पति, ससुर व जेठ को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। तीनों आरोपियों ने हत्या के आरोप में कई साल सलाखों के पीछे बिताए।

झारखंड में बदली पहचान के साथ रह रही थी महिला
घटना के इतने साल बीत जाने के बाद हाल ही में परिजनों को गुप्त सूचना मिली कि सरस्वती देवी मरी नहीं है, बल्कि वह झारखंड के गढ़वा जिले के कांडी थाना क्षेत्र के लभारी गांव में रह रही है। उसने अपना नाम बदलकर ‘कांति देवी’ रख लिया था और वह वहां रट्टू सिंह नामक व्यक्ति के साथ रह रही थी। इस बात की भनक लगते ही परिजनों ने स्थानीय पुलिस को इसकी सूचना दी। सूचना के आधार पर डेहरी मुफस्सिल थाने की पुलिस झारखंड पहुंची और छानबीन कर महिला को अपने कब्जे में ले लिया। पुलिस ने उसे सासाराम लाकर अदालत में पेश किया, जहां से आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
अब पुलिस के सामने खड़े हुए नए और गंभीर सवाल
इस पूरी घटना ने पुलिसिया जांच और न्याय प्रणाली पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि 12 साल पहले पुलिस ने जिस महिला के शव को नहर से बरामद किया था और जिसे मृत मानकर पोस्टमार्टम कराया गया था, आखिर वह महिला कौन थी? इसके अलावा, बिना ठोस तकनीकी या वैज्ञानिक जांच (जैसे डीएनए फिंगरप्रिंटिंग) के इतनी बड़ी लापरवाही कैसे बरती गई, जिसके कारण एक जीवित महिला के फर्जी कत्ल के इल्जाम में निर्दोष लोग वर्षों तक जेल की सजा भुगतने को मजबूर हुए। फिलहाल, पुलिस अब नए सिरे से इस बात की जांच कर रही है कि 2014 में नहर में मिला शव किसका था और इस पूरे मामले में इतनी बड़ी चूक कहां हुई।



