“Often the written word can accomplish what the spoken word cannot” – शब्दों में अपार शक्ति होती है, लिखित शब्द बोले गए शब्दों से ज़्यादा प्रभावशाली होते हैं. जब मौखिक रूप से कुछ बोला जाता है तो भावनाएं क्षणिक होती हैं और विचार उस तरह से व्यक्त नहीं हो पाते जिसे कालांतर तक सहेजा जा सके. लेकिन अभिव्यक्ति जब लेखनी का रूप लेती है तब हमें सोचने, समझने और अपने भावों को सटीक रूप में प्रस्तुत करने का समय मिलता है.
लिखते समय इस बात को हमेशा स्मरण में रखना चाहिए कि लिखित शब्द स्थायी होते हैं. एक बार जो बात लिख दी जाती है वह समय के साथ भी अपनी शक्ति बनाए रखती है. इतिहास साक्षी है कि महान विचारकों, लेखकों और नेताओं के लिखे हुए शब्दों ने समाज में क्रांति लाई है. यह तभी सम्भव हो पाता है जब उनकी लेखनी ने लोगों के दिलों को छुने और उन्हें नई दिशा देने का काम किया है.
मन की बात किसी के समक्ष कहने में झिझक या भय हमेशा बाधा बनती हैं मगर वही बात जब कागज़ पर उतरती है तो अधिक स्पष्ट, सच्ची और प्रभावशाली बन जाती है. लिखित शब्द हमें अपनी भावनाओं को गहराई से व्यक्त करने का अवसर देते हैं जिसे पढ़ने वाला बेहतर समझ पाता है.
“कवित बिबेक एक नहिं मोरे.
सत्य कहउँ लिखि कागद कोरे॥”
महाकवि तुलसीदास द्वारा रचित रामचरितमानस के बालकांड से ली गई इस पंक्ति का अर्थ यह है कि “मुझमें कविता की समझ या विवेक रत्ती भर भी नहीं है. मैं कोरे कागज़ पर जो भी लिख रहा हूँ वह सत्य और हृदय की गहराई से है. तुलसीदास जी ने अपनी इस पंक्ति से लिखित शब्दों की सच्चाई और स्पष्टता को बल देने का काम किया है. आज के डिजिटल युग में भी लिखित शब्दों का महत्व कम नही हुआ है बल्कि और बढ़ गया है. ऐसे भी बहुत से उदाहरण है जब एक संदेश, एक ईमेल या एक प्रेरणादायक लेख से किसी के जीवन में सकारात्मक बदलाव आया है. लेखनी की शक्ति को पहचानते हुए सही शब्दों का चयन करके न केवल अपने विचारों को प्रभावी बना सकते हैं बल्कि दूसरों के जीवन में भी आमूलचूल परिवर्तन किया जा सकता है. सच्चाई यह है कि लिखित शब्द वह करके दिखा सकते हैं जो कई बार बोले गए शब्द नहीं कर पाते.

संदीप अखिल
सलाहकार संपादक
न्यूज़ 24 मध्य प्रदेश-छत्तीसगढ़ / लल्लूराम डॉट कॉम
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