Jharkhand Adivasi Mahotsav: विश्व आदिवासी दिवस (World Tribal Day 2026) पर झारखंड की राजधानी रांची में आदिवासी महोत्सव का आयोजना हो रहा है। रांची के मोरहाबादी मैदान में होने वाले दो दिवसीय आदिवासी महोत्सव का उद्घाटन सीएम हेमंत सोरेन (CM Hemant Soren) करेंगे।

यह महोत्सव झारखंड की समृद्ध आदिवासी संस्कृति, बलिदान गाथा और 32 जनजातियों की गौरवशाली परंपरा को प्रदर्शित करेगा। इसमें पारंपरिक खानपान, फैशन शो से लेकर फिल्म स्क्रीनिंग तक का आयोजन होगा।

आदिवासी महोत्सव में राज्य के आदिवासी समाज की बलिदान गाथा भी होगी और सांस्कृतिक मूल्यों को जीने वाले 32 जनजातियों की गौरवशाली परंपरा को भी दिखाया जाएगा। दो दिनों तक 60 कलाकारों की उपस्थिति में मांदर से लेकर स्थानीय वाद्ययंत्रों पर समुधुर ध्वनि बिखेरी जाएगी।

महोत्सव में पारंपरिक खानपान से लेकर वेशभूषा तक के लिए कई पवेलियन होंगे। राज्य सरकार इसे भव्य के साथ आदिवासी जीवन पद्धति की पहचान के तौर पर स्थापित कर रही है। आदिवासी महोत्सव में झारखंड के 600 से अधिक कलाकार शामिल होंगे। पांच जनजातीय मुंडारी, कुडुख, संथाली, हो और खड़िया के कलाकार शामिल हैं। चार जनजातीय भाषाओं में पंचपरगनिया, कुरमाली, नागपुरी और खोरठा भाषा के नृत्य संगीत की प्रस्तुति की जाएगी।

नितेश कच्छप एवं अन्य कलाकार देंगे प्रस्तुति

झारखंड की लोकधुनों को अपनी आवाज़ से नई पहचान देने वाले नितेश कच्छप, नागपुरी लोकगायक एवं कलाकार महोत्सव में अपनी शानदार प्रस्तुति से समां बांधेंगे। कार्यक्रम में कई अन्य जनजातीय कलाकार भी अपनी प्रस्तुति देंगे।

फिल्म की स्क्रीनिंग भी

अमर शहीद चांद भैरव मुर्मू मंडप में झारखंड फिल्म डवलपमेंट कारपोरेशन लिमिटेड की ओर से विशेष फिल्म स्क्रीनिंग का आयोजन किया जाएगा।इस दौरान आदिवासी जीवन, संस्कृति और सामाजिक सरोकारों से जुड़ी कई बेहतरीन शार्ट फिल्मों का प्रदर्शन किया जाएगा।

महोत्सव हमारे अपने अस्तित्व, अस्मिता और अधिकारों के प्रति हमारे संकल्प का भी उत्सवः हेमेंत

आदिवासी महोत्सव पर सीएम हेमंत सोरेन ने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा- झारखंड में हर वर्ष की तरह आज फिर ऐतिहासिक झारखंड आदिवासी महोत्सव मनाया जा रहा है। विश्व आदिवासी दिवस के शुभ अवसर पर आयोजित होने वाले इस महाआयोजन के लिए आप सभी का हार्दिक स्वागत, शुभकामनाएं और जोहार। झारखंड की धरती ने दुनिया को ऐसा जीवन दर्शन दिया है, जहाँ प्रकृति पूजनीय है, समुदाय सर्वोपरि है और संस्कृति जीवन का हिस्सा है। यह महोत्सव केवल हमारी समृद्ध आदिवासी संस्कृति, परंपरा और विरासत का उत्सव नहीं, बल्कि अपने अस्तित्व, अस्मिता और अधिकारों के प्रति हमारे संकल्प का भी उत्सव है। जल, जंगल, जमीन और अपनी पहचान की रक्षा की लड़ाई हमारी विरासत है, और आने वाली पीढ़ियों के लिए इसे सुरक्षित रखना हमारा संकल्प। अबुआ दिशुम, अबुआ राज – अबुआ पहचान के साथ, अबुआ भविष्य की ओर। झारखंड के वीर शहीद अमर रहें! जय झारखंड!

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