विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर मध्यप्रदेश के विभिन्न हिस्सों में आदिवासी समाज द्वारा अपनी संस्कृति, परंपरा और अधिकारों के संरक्षण के लिए भव्य कार्यक्रमों और सांस्कृतिक रैलियों का आयोजन किया गया। खजुराहो और धार जिलों में युवाओं और सामाजिक संगठनों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और अपनी एकजुटता का संदेश दिया।
जल, जंगल, जमीन की सुरक्षा
शशांक द्विवेदी, खजुराहो। विश्व आदिवासी दिवस पर गोंडवाना कर्मचारी संघ, जय आदिवासी युवा शक्ति (JAYS) और युवा जयस संगठन के नेतृत्व में खजुराहो के मेला ग्राउंड में एक भव्य मंचीय कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान आदिवासी समाज के लोगों ने अपनी परंपरागत रीति-रिवाज, सांस्कृतिक वेशभूषा और लोक कला का प्रदर्शन किया। कार्यक्रम में प्रशासन के समक्ष जल, जंगल और जमीन के संरक्षण के साथ-साथ आदिवासी संस्कृति की सुरक्षा और भगवान बिरसा मुंडा की प्रतिमा स्थापित करने की प्रमुख मांगें रखी गईं। समापन के बाद मेला ग्राउंड से पायल तिराहा तक एक विशाल रैली निकाली गई। जानकारी अनाड़ी लाल कोंदर (प्रदेश उपाध्यक्ष, गोंडवाना कर्मचारी संघ) और राममिलन आदिवासी (जिलाध्यक्ष, BJP अनुसूचित जनजाति मोर्चा, छतरपुर ने दी।
तीर-कमान और पारंपरिक वाद्ययंत्रों के साथ थिरके युवा
रेणु अग्रवाल, धार। शहर में विशाल सांस्कृतिक रैली का आयोजन किया गया, जिसमें भारी तादाद में युवाओं ने भाग लिया। पारंपरिक आदिवासी वेशभूषा में सजे-धजे युवा हाथों में तीर-कमान थामे और पारंपरिक वाद्ययंत्रों की थाप पर झूमते-गाते और कुर्राटी भरते नजर आए। यह सांस्कृतिक रैली शहर के प्रमुख मार्गों से होती हुई उदय रंजन क्लब मैदान पहुंची, जहां इसका समापन हुआ। रैली के जरिए आदिवासी समाज की समृद्ध संस्कृति, परंपरा और सामाजिक एकजुटता का प्रभावी संदेश दिया गया। इसके बाद आयोजित मंचीय कार्यक्रम के अंत में जिला प्रशासन को विभिन्न मांगों को लेकर ज्ञापन भी सौंपा गया।
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