Rajasthan Yamuna Water Project: हरियाणा के हथिनीकुंड बैराज से अब राजस्थान तक यमुना का पानी पहुंचेगा। दिल्ली में हरियाणा और राजस्थान सरकार के बीच हुए MoA (Memorandum of Understanding) ने दशकों पुराने इंतजार को खत्म कर दिया है। यह दिन राजस्थान के लिए ऐतिहासिक है।

अब इस समझौते के बाद राजनीति भी तेज हो गई है। भाजपा के दिग्गज नेता राजेंद्र राठौड़ ने सीधे पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को चुनौती दे दी है। राठौड़ ने कहा, गहलोत साहब ने कहा था कि जिस दिन यमुना का पानी राजस्थान आएगा, वे मुख्यमंत्री का सम्मान करेंगे। अब जब मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा जयपुर लौट रहे हैं, तो राठौड़ की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या गहलोत अपना वादा निभाते हुए एयरपोर्ट पहुंचेंगे?

शेखावाटी की बदलेगी किस्मत

इस परियोजना का सबसे बड़ा फायदा सीकर, चूरू और झुंझुनूं जैसे जिलों को होगा। लंबे समय से ये इलाके भूजल (groundwater) के भरोसे हैं। गिरते जलस्तर की वजह से यहां पेयजल संकट एक बड़ी चुनौती बना हुआ था। अब यमुना का पानी आने से यहां के लाखों लोगों की प्यास बुझेगी और सिंचाई के लिए भी पानी मिलेगा।

कैसे पहुंचेगा घर-घर पानी?

इस पूरी योजना के लिए जमीन के अंदर काम होगा। 295.5 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन बिछाई जाएगी जो हथिनीकुंड से हंसियावास जलाशय (चूरू) तक जाएगी। 3.6 मीटर व्यास की तीन विशाल अंडरग्राउंड पाइपलाइन डाली जाएंगी। इस प्रोजेक्ट पर करीब 34,102 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। पाइपलाइन के साथ ही नई सड़कें और आधुनिक जल प्रबंधन सिस्टम भी तैयार होगा।

30 साल पुरानी अड़चन खत्म

याद दिला दें कि यमुना के पानी को लेकर 1994 में ही समझौता हुआ था। कागजों में तो हिस्सा तय था, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही थी। दशकों तक यह फाइलें दफ्तरों में धूल फांकती रही। अब जाकर राजस्थान के लिए यह उम्मीद जगी है। राजेंद्र राठौड़ ने सीएम भजनलाल शर्मा को आधुनिक राजस्थान का भगीरथ बताते हुए कहा कि इसे नेशनल प्रोजेक्ट का दर्जा दिलाने के लिए भी कोशिशें जारी हैं। सिर्फ राजस्थान ही नहीं, हरियाणा के भी 10 स्थानों पर इस योजना से पीने का पानी मिलेगा।

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