हरियाणा के यमुनानगर में भारतीय किसान यूनियन ने पंजाब नेशनल बैंक की शाखा के बाहर तालाबंदी कर उग्र प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारी बैंक प्रबंधन से 77 वर्षीय बुजुर्ग किसान मोहन सिंह के बेटे द्वारा लिए गए होम लोन का मानवीय आधार पर निपटारा करने की मांग कर रहे हैं।
यमुनानगर। जिले के विश्वकर्मा चौक पर सोमवार को भारतीय किसान यूनियन के बैनर तले किसानों ने पंजाब नेशनल बैंक (PNB) के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। आंदोलनकारी किसानों ने बैंक के मुख्य प्रवेश द्वार पर ताला लटकाकर वहीं धरना देना शुरू कर दिया। यह पूरा विवाद 77 साल के बुजुर्ग किसान मोहन सिंह को बैंक द्वारा भेजे जा रहे होम लोन रिकवरी नोटिस से जुड़ा है, जिसका किसान संगठन मानवीय आधार पर निपटारा करने की मांग कर रहा है।
बैंक गेट पर जड़ा ताला
शाखा के बाहर अचानक शुरू हुए इस प्रदर्शन और तालाबंदी की खबर मिलते ही स्थानीय पुलिस प्रशासन तुरंत मौके पर पहुंच गया। पुलिस अधिकारियों ने माहौल को शांत करने के उद्देश्य से किसान संगठनों के पदाधिकारियों से वार्ता की, परंतु प्रदर्शनकारी अपनी मांग पर पूरी तरह डटे रहे। किसानों का साफ तौर पर कहना है कि जब तक बैंक प्रशासन इस कर्ज के मामले में पीड़ित परिवार को राहत देने का ठोस फैसला नहीं करता, तब तक उनका यह आंदोलन लगातार जारी रहेगा।
बेटों की मौत के बाद संकट
भारतीय किसान यूनियन के जिला अध्यक्ष सुभाष गुर्जर ने मामले की जानकारी देते हुए बताया कि जम्मू कॉलोनी के रहने वाले मोहन सिंह के बेटे रणजीत सिंह ने पंजाब नेशनल बैंक से लगभग 10 लाख रुपये का होम लोन लिया था। कर्ज लेने के कुछ समय बाद रणजीत सिंह का निधन हो गया, जिससे पूरे परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा और वे गंभीर आर्थिक तंगी से घिर गए। वर्तमान में मोहन सिंह के दोनों बेटों की मृत्यु हो चुकी है और इस बुजुर्ग के पास कमाई का कोई भी जरिया नहीं बचा है। इस बेहद विकट परिस्थिति के बावजूद पीड़ित परिवार ने जैसे-तैसे करीब साढ़े चार लाख रुपये बैंक खाते में जमा भी कराए, लेकिन वे बाकी की बची रकम चुका पाने में पूरी तरह लाचार हैं।
मानवीय आधार पर राहत की मांग
किसान नेताओं ने बैंक प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि मासिक किस्तें रुकने के बाद से ही बैंक लगातार वसूली के लिए सख्त कदम उठा रहा है। बैंक कर्मियों को बार-बार घर भेजने और मकान पर नोटिस चिपकाने की कार्रवाई से बुजुर्ग किसान और उनका परिवार गहरे मानसिक तनाव से गुजर रहा है। पीड़ित मोहन सिंह ने अपनी दयनीय स्थिति का हवाला देते हुए बैंक से इस ऋण को मानवीय दृष्टिकोण से बंद करने की गुहार लगाई है, क्योंकि कुछ दिनों पहले उच्चाधिकारियों से मुलाकात के बाद भी इसका कोई समाधान नहीं निकल सका था।

