मुजफ्फरपुर। चीन की जेल में पिछले पांच महीने से बंद भारतीय नाविक यश सिंह की वतन वापसी के लिए प्रशासनिक और कूटनीतिक प्रयास अब तेज हो गए हैं। यश की मां निशी रानी ने सांसद डॉ. राज भूषण चौधरी से मिलकर अपने बेटे की गिरफ्तारी और उसकी दयनीय स्थिति के बारे में विस्तार से बताया था।
​परिवार की गुहार पर कार्रवाई करते हुए सांसद ने विदेश राज्य मंत्री को पत्र लिखा है। पत्र में आग्रह किया गया है कि भारतीय दूतावास और संबंधित कूटनीतिक माध्यमों से चीन सरकार पर दबाव बनाया जाए ताकि यश सिंह की सुरक्षित भारत वापसी जल्द से जल्द सुनिश्चित हो सके। पीड़ित परिवार का कहना है कि केंद्र सरकार द्वारा मामले को गंभीरता से लिए जाने के बाद उन्हें एक बड़ी राहत और उम्मीद मिली है।

​शिपिंग कंपनी के अधिकारियों से होगी आज अहम बैठक

​यश सिंह की मां शुक्रवार को मुंबई पहुंचकर शिपिंग कंपनी के मानव संसाधन (HR) अधिकारियों से मुलाकात करेंगी। इस बैठक का मुख्य एजेंडा कंपनी द्वारा अब तक उठाए गए कदमों की समीक्षा करना, भारतीय दूतावास और चीनी अधिकारियों के बीच हुए संवाद की जानकारी लेना तथा रिहाई के लिए भविष्य की रणनीति तय करना है।
​परिजनों का आरोप है कि घटना के बाद से कंपनी की ओर से केवल आश्वासन ही मिले हैं। ऐसे में इस बैठक से उन्हें किसी ठोस और सकारात्मक पहल की पूरी उम्मीद है। परिवार लगातार विदेश मंत्रालय, केंद्र सरकार और कंपनी के संपर्क में बना हुआ है।

​क्या है पूरा मामला और कैसे हुई गिरफ्तारी?

​यश सिंह मुंबई की एक शिपिंग कंपनी में ऑर्डिनरी सीमन (ओएस) के पद पर तैनात हैं। इसी साल फरवरी में उनका जहाज एक तकनीकी खराबी के चलते चीन के शंघाई स्थित जियांग्सू पोर्ट पर रुका था।
​गत 28 फरवरी को जब यश जहाज से उतरकर दैनिक आवश्यकता का सामान खरीदने के लिए तटवर्ती शहर गए थे, तो कथित तौर पर उनकी एक स्थानीय नागरिक के साथ कहासुनी और झड़प हो गई। इसी विवाद के बाद स्थानीय चीनी पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया और तब से वे डिटेंशन सेंटर में हैं।

​महीनों से बेटे की आवाज सुनने को तरस रहा परिवार

​शिपिंग कंपनी ने 3 मार्च को ई-मेल के जरिए परिवार को यश की गिरफ्तारी की सूचना दी थी। तब से लेकर अब तक यानी पिछले पांच महीनों में परिवार की यश से एक बार भी सीधी बात नहीं हो पाई है। बेटे की इस लंबी कैद और उससे संपर्क न हो पाने के कारण माता-पिता और अन्य परिजनों की चिंता हर दिन बढ़ती जा रही है। अब सभी की निगाहें केंद्र सरकार के कूटनीतिक प्रयासों और आज होने वाली बैठक के नतीजों पर टिकी हैं।