मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार शाम लखनऊ पुलिस लाइन में आयोजित श्रीकृष्ण जन्मोत्सव-2026 कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए कहा कि आक्रांता मंदिर तो तोड़ सकते हैं लेकिन भारतवासी की आस्था को कभी नष्ट नहीं कर सकते. उन्होंने कहा कि इतिहास गवाह है कि जिन्होंने हमारी संस्कृति को मिटाने की कोशिश की, वे खुद इतिहास के पन्नों में गायब हो गए.

सतीश सिंह, लखनऊ. श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि आक्रांता मंदिर तो तोड़ सकता है लेकिन आस्था नहीं तोड़ सकता है. उन्होंने कहा कि वो मूर्तियां तोड़ सकते हैं, लेकिन मूल्य नहीं, वो मंदिरों के ऊपर अपनी इमारत खड़ी कर सकते हैं, लेकिन मन में बसे श्रीराम, श्रीकृष्ण को वो कभी छू भी नहीं पाए.

सोमनाथ और अयोध्या का दिया उदाहरण

शुक्रवार शाम को लखनऊ के पुलिस लाइन में ‘श्रीकृष्ण जन्मोत्सव-2026’ कार्यक्रम के शुभारंभ के मौके पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि याद रखिये, सोमनाथ का मंदिर बार-बार टूटा लेकिन भारत ने उसे बार-बार बनाया. अयोध्या में श्रीरामजन्मभूमि मंदिर बार-बार टूटा लेकिन आज अपनी अजेय पताका के साथ खड़ा है. काशी विश्वनाथ मंदिर बार-बार टूटा लेकिन अहिल्याबाई होल्कर ने और आधुनिक भारत में प्रधानमंत्री मोदी ने काशी विश्वनाथ धाम को दिव्य स्वरूप दिया.

आस्था मिटाने वाले खुद इतिहास में मिट गए

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जिन लोगों ने हमें मिटाने का प्रयास किया, हमारी आस्था को नष्ट करने का प्रयास किया, वो स्वयं इतिहास के पन्नों में मिट गए. कोई पूछने वाला नहीं है. हमारा भारत आज भी जीवित है, जागृत है, शाश्वत रूप में अपनी यात्रा को लेकर चल रहा है.

श्रीकृष्ण ने समाज को प्रकाश का मार्ग दिखाया

कहा कि श्रीकृष्ण का जन्म अंधकार में जेल में हुआ, लेकिन उन्होंने समाज को प्रकाश का मार्ग दिखाया. अनेक ऐसी घटनाएं हैं. मुख्यमंत्री ने कहा कि धर्म, सत्य और न्याय की स्थापना के लिए प्रभु का अवतरण हुआ. यह धर्म वही कर्तव्य है जो अन्याय के खिलाफ श्रीकृष्ण को कंस के खिलाफ और महाभारत युद्ध में देखा. जीवन में जब भ्रम-संशय हो तो उस समय प्रेरणा प्रदान करने वाला श्रीकृष्ण का संदेश हर भारतवासी श्रद्धा से अनुकरण करता है.

प्रतिस्पर्धा सकारात्मक हो, नकारात्मक नहीं

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज प्रत्येक क्षेत्र में एक नई प्रतिस्पर्धा है, एक नए भाव के साथ पूरा देश आगे बढ़ने के लिए उत्सुक दिखाई देता है, लेकिन वह प्रतिस्पर्धा सकारात्मक हो, नकारात्मक नहीं. जिन लोगों ने आस्था को नष्ट करने का प्रयास किया था, उनका भाव नकारात्मक था, इसलिए स्वयं नष्ट हो गए. उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने भारत की भाव और भंगिमा को नष्ट करने का प्रयास किया था, वे इतिहास में नाम शेष हो गए. भारत अपनी अजेय यात्रा को लेकर के आज भी चल रहा है और हम सबको इस बारे में ध्यान रखना होगा. अपने कर्तव्य पथ पर निष्काम कर्म को अपने जीवन का हिस्सा बनाते हुए जब तक हम आगे बढ़ते रहेंगे, इस देश की यह विजय यात्रा इसी रूप में आगे बढ़ती रहेगी.