लखनऊ. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हाल ही में अपनी नीदरलैंड यात्रा से 11वीं सदी के चोल ताम्रपत्र (Chola Copper Plates) वापस लेकर आए हैं. इसका जिक्र आज सीएम योगी ने अपनी पाती में किया है. उन्होंने लिखा है कि ‘आज की पाती एक प्रश्न से. मैं आपसे पूछे कि भारत की आत्मा क्या है? बहुत संभव है आपका उत्तर वेद, उपनिषद, पुराण, रामायण, महाभारत, गीता, मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम, लीलाधर श्रीकृष्ण, महात्मा बुद्ध, भगवान महावीर, गुरु नानकदेव, संत कबीर, मानवता में कोई एक हो. वहीं मन में सहज जिज्ञासा होती है कि कैसे? उत्तर है, भारत की यह अक्षुण्ण पहचान श्रवण परंपरा से पाण्डुलिपियों में संरक्षित की गई और तकनीकी उन्नयन के बाद ग्रंथों के रूप में घर-घर पहुंची. यही कारण है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पाण्डुलिपियों को भारत की आत्मा का अध्याय मानते हैं.’
सीएम ने आगे लिखा कि ‘वस्तुतः हमारी शक्ति वह ज्ञान है, जिसे सदियों से पाण्डुलिपियों के रूप में सहेजा गया. भारत की सांस्कृतिक-बौद्धिक धरोहर और सभ्यतागत विचारों की निरंतरता पाण्डुलिपियों की विशाल संपदा में परिलक्षित होती है. भारतीय ग्रंथ विज्ञान, चिकित्सा, गणित, खगोल विज्ञान, साहित्य, कला, वास्तुकला, दर्शन, संगीत और आध्यात्मिकता जैसे विषयों का ज्ञान भंडार है. उत्तर प्रदेश सांस्कृतिक पुनर्जागरण की पुण्यभूमि है. अयोध्या में प्रभु श्रीराम का भव्य मंदिर हो या अविनाशी काशी, हम सब इसके साक्षी हैं. पीढ़ियों से संचित ज्ञान का लाभ आज हम इसलिए ले पा रहे हैं, क्योंकि ये पाण्डुलिपियां हजारों वर्षों से ज्ञान चेतना जाग्रत करती रहीं. ये पाण्डुलिपिमां आज विभिन्न संग्रहालयों, पुस्तकालयों और निजी संग्रहों में उपलब्ध है.’
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योगी ने लिखा कि ‘ज्ञान विस्तार के संदर्भ में भारत सरकार की एक ऐतिहासिक पहल है ‘ज्ञान भारतम् मिशन’. इसके तहत प्राचीन पाण्डुलिपिमां डिजिटलाइज की जा रही है. इसी क्रम में एक नेशनल डिजिटल रिपोजिटिरी बनाई जाएगी, जहां दुनिया भर के विद्यार्थी, शोधकर्ता भारत की ज्ञान परंपरा से जुड़ सकेंगे. पाण्डुलिपियों का संरक्षण केवल विरासत को बचाना नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए ज्ञान की अमूल्म कुंजी को सुरक्षित रखना है. मैं प्रदेशवासियों से आग्रह करता हूं कि पाण्डुलिपियों के संरक्षण के लिए आगे आएं. अब तक लगभग 7 लाख पाण्डुलिपियों की पहचान की जा चुकी है. यदि आपके पास भी कोई प्राचीन पाण्डुलिपि, हस्तलिखित ग्रंथ, ताड़पत्र आदि उपलब्ध हैं, तो इसकी जानकारी ‘ज्ञान भारतम् मोबाइल ऐप’ अथवा पोर्टल पर अपलोड करें, ताकि उसका संरक्षण सुनिश्चित घेत किया जा सके.’
योगी ने लिखा कि ‘आप इन्हें उत्तर प्रदेश राजकीम अभिलेखागार को दान भी कर सकते हैं. यह मिशन हमारी सभ्यतागत जड़ों के लिए अमृत समान है. इससे देश अतीत के ज्ञान को अपने वर्तमान नवाचार के साथ जोड़कर प्रधानमंत्री जी के वर्ष 2047 तक विकसित भारत के विजन की दिशा में अग्रसर होगा.’

