गोरखपुर. श्री गोरखनाथ मंदिर परिसर में आयोजित सप्त दिवसीय भव्य श्रीराम कथा की पूर्णाहुति कार्यक्रम में बुधवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भारतीय संस्कृति, सनातन परंपरा, देश की एकता और प्राचीन ज्ञान के संरक्षण पर विस्तार से अपने विचार रखे. उन्होंने कहा कि भारतीय परंपरा में गुरु केवल शिक्षक नहीं, बल्कि वह हर व्यक्ति है जिससे जीवन में कुछ सीखने को मिले.

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयासों से 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के रूप में विश्वभर में मान्यता मिली. योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि भारत की ऋषि परंपरा का वैज्ञानिक अनुसंधान है. उन्होंने देशवासियों से प्राचीन धरोहरों के संरक्षण का आह्वान करते हुए कहा कि पुरानी पांडुलिपियां, ताम्रपत्र, प्राचीन सिक्के और ऐतिहासिक अवशेष हमारी ज्ञान परंपरा की अमूल्य धरोहर हैं. उत्तर प्रदेश में ऐसे लाखों ताम्रपत्र, पांडुलिपियां और पुराने सिक्के प्राप्त हुए हैं, जो भारत की समृद्ध बौद्धिक विरासत के प्रमाण हैं.

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सीएम योगी ने कहा कि यह कहना कि भारत का निर्माण अंग्रेजों ने किया, देश का सबसे बड़ा अपमान है. उन्होंने कहा कि भारत हजारों वर्षों से एक राष्ट्र के रूप में अस्तित्व में रहा है. यहां भले ही भाषाएं, वेशभूषाएं, जातियां और उपासना पद्धतियां अलग रही हों, लेकिन उत्तर से दक्षिण और पूरब से पश्चिम तक देश हमेशा एक सांस्कृतिक सूत्र में बंधा रहा है. उन्होंने कहा कि समय-समय पर राजनीति की विकृतियों ने जातीयता और क्षेत्रीयता के नाम पर देश को बांटने का प्रयास किया, लेकिन भारत ने इन चुनौतियों से ऊपर उठकर “एक भारत-श्रेष्ठ भारत” की भावना को मजबूत किया। आज देश जिस स्वतंत्रता का आनंद ले रहा है, वह इसी राष्ट्रीय एकता का परिणाम है.

मुख्यमंत्री ने कहा कि जब भी भारत ने प्रगति की दिशा में बड़ा कदम बढ़ाया, उसके सामने चुनौतियां भी खड़ी हुईं. उन्होंने भगवान श्रीराम के वनवास, माता सीता के वनवास, महाभारत और चंद्रगुप्त मौर्य-चाणक्य के कालखंड का उल्लेख करते हुए कहा कि इतिहास बताता है कि जब राष्ट्र आगे बढ़ता है, तब उसे भीतर और बाहर दोनों तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ता है. योगी आदित्यनाथ ने कहा कि दुनिया की कुछ ताकतें अपने स्वार्थ के लिए सनातन संस्कृति को कमजोर करना चाहती हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे लोगों के प्रवक्ता समाज के भीतर से ही निकलकर भ्रम फैलाने का प्रयास कर रहे हैं. उन्होंने समाज से सतर्क रहने की अपील करते हुए कहा कि जितना समाज जागरूक और संगठित रहेगा, उतना ही परिवार, समाज और राष्ट्र समृद्ध होगा.

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मुख्यमंत्री ने नक्सलवाद का भी उल्लेख करते हुए कहा कि 12 वर्ष पहले देश के 120 जिलों में नक्सलवाद का प्रभाव था, लेकिन आज वह लगभग समाप्त हो चुका है. उन्होंने कहा कि नक्सलवाद को बढ़ावा देने वाली शक्तियां अब नए और छद्म रूपों में सामने आने की कोशिश करेंगी, इसलिए समाज को हर स्तर पर सजग रहने की आवश्यकता है. उन्होंने कहा कि भारत की तेजी से बढ़ती प्रगति दुनिया के कुछ देशों को पसंद नहीं आ रही, इसलिए देशवासियों को राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक मूल्यों की रक्षा के लिए सदैव सतर्क रहना होगा.