Lalluram Desk. सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए बेहद पवित्र माना जाता है। इस दौरान शिवलिंग पर जल, बेलपत्र, आक और धतूरा अर्पित करने की परंपरा है। सावन शुरू होते ही बाजारों और मंदिरों के बाहर धतूरे की मांग काफी बढ़ जाती है, जिसके चलते एक धतूरा 10 रुपये या उससे अधिक कीमत में भी बिकता है। ऐसे में अगर आप हर बार धतूरा खरीदने से बचना चाहते हैं, तो इसे घर पर ही आसानी से उगा सकते हैं। खास बात यह है कि धतूरे का पौधा किसी महंगे गमले में ही नहीं, बल्कि पुरानी प्लास्टिक की बाल्टी में भी अच्छी तरह तैयार हो जाता है।

सही गमला और मिट्टी का करें चुनाव

धतूरा एक मजबूत और कम देखभाल वाला पौधा है, लेकिनइसकी अच्छी ग्रोथ के लिए सही मिट्टी जरूरी होती है। इसके लिए 10 से 12 इंच का गमला या पुरानी बाल्टी लें और नीचे पानी निकासी के लिए छेद जरूर करें। मिट्टी तैयार करने के लिए 50 प्रतिशत सामान्य बगीचे की मिट्टी, 30 प्रतिशत सड़ी हुई गोबर की खाद या कम्पोस्ट और 20 प्रतिशत रेत या कोकोपीटमिलाएं। यह मिश्रण पौधे की जड़ों को पर्याप्त पोषण और जल निकासी दोनों उपलब्ध कराता है।

बीज लगाने का आसान तरीका

धतूरे के बीज पके हुए फल से निकाले जा सकते हैं या नर्सरी से खरीदे जा सकते हैं। बीजों को लगभग 1 से 2 सेंटीमीटर गहराई में बोएं और ऊपर से हल्की मिट्टी डाल दें। इसके बाद पानी का हल्का छिड़काव करें। गमले को ऐसी जगह रखें, जहां रोजाना कम से कम 5 से 6 घंटे धूप आती हो। सामान्यतः 7 से 21 दिनों के भीतर बीज अंकुरित होने लगते हैं।

पिंचिंग तकनीक से बढ़ेगी ग्रोथ

अगर आप चाहते हैं कि पौधा ज्यादा शाखाएं निकाले और उस परअधिक फूल व फल आएं, तो पिंचिंग तकनीक अपनाएं। जबपौधा लगभग 6 से 8 इंच ऊंचा हो जाए, तब उसकी सबसे ऊपर की कोमल नोक को हल्के हाथों से तोड़ दें। इससे पौधे की ऊर्जा नई शाखाएं बनाने में लगती है, जिससे वह अधिक घना और स्वस्थ बनता है।

सिंचाई और खाद का रखें ध्यान

धतूरे के पौधे को बहुत ज्यादा पानी की जरूरत नहीं होती। मिट्टी सूखने लगे तभी पानी दें। अधिक पानी देने से जड़ों में सड़न की समस्या हो सकती है। इसके अलावा हर 20 से 30 दिन में थोड़ी मात्रा में वर्मीकम्पोस्ट या जैविक खाद डालते रहें। इससे पौधे की बढ़वार बेहतर होती है और फूल आने की संभावना भी बढ़ जाती है।

सावधानी भी है जरूरी

धतूरा धार्मिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, लेकिन यह एक विषैला पौधा भी है। इसके बीज, पत्तियां, फूल और फल खाने योग्य नहीं होते। इसलिए इसे बच्चों और पालतू जानवरों की पहुंच से दूर रखें। पौधे की छंटाई या फल तोड़ने के बाद हाथ अच्छी तरह धोना भी जरूरी है।

अगर सही तरीके से देखभाल की जाए तो कुछ ही समय में धतूरेका पौधा फूल और फल देने लगता है। ऐसे में सावन ही नहीं, सालभर भगवान शिव की पूजा के लिए आपको घर पर ही ताजाधतूरा आसानी से मिल सकता है।

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