असम सरकार ने राज्य में जमीनों की खरीद-बिक्री और सुरक्षा को लेकर कई कड़े और अहम फैसले किए हैं. सरकार ने एक नया कानून बनाया है. इस कानून के अंतर्गत गोवालपाड़ा, धुबरी और बारपेटा जिलों में अब केवल ‘खिलंजिया’ यानी असम के मूल निवासी जमीन खरीद और बेच सकेंगे. यह बदलाव 40 साल बाद आया है. खिलंजिया लोगों के लिए इस तरह का बड़ा फैसला लिया गया है.

यह महत्वपूर्ण बदलाव स्थानीय और मूल निवासियों की जमीनों की सुरक्षा के लिए लगभग 40 साल बाद किया गया है. खिलंजिया लोगों के लिए इस तरह का बड़ा फैसला लिया गया है.

गुवाहाटी में कथित तौर पर सीएम हिमंत बिस्वा सरमा ने बताया कि यह नियम असम के 3 जिलों में लागू होगा. अब यहां केवल वही लोग जमीन की खरीद-बिक्री कर सकेंगे जो असम के मूल निवासी हैं. इसके अलावे इन जिलों में अब कोई भी राज्य के बाहर का जमीन खरीद-बिक्री नहीं कर सकेगा.

इस फैसले के पीछे CM हिमंत बिस्वा सरमा का मसकद स्थानीय और मूल निवासियों की जमीन को सुरक्षित रखना बताया गया है. इस कानून के जरिए सरकार स्थानीय लोगों की जमीनों की सुरक्षा करना चाहती है, ताकि उनकी अनिश्चितता को कम किया जा सके.

गुवाहाटी में लोक सेवा भवन में मीडिया से बात करते हुए CM हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि उन्होंने यह अपील 15 अगस्त को की थी, खासकर उन लोगों से जो दूसरे राज्यों से असम आए थे और दशकों से राज्य में रह रहे हैं. CM हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि आने वाली जनगणना 2027 ने इन लोगों को असम की पहचान के साथ घुलने-मिलने का मौका दिया है.

सरकार का कहना है कि असमिया लोगों को अपनी मातृभाषा के तौर पर दर्ज करा पाने का अवसर स्वैच्छिक होगा. इसका मुख्य उद्देश्य उन क्षेत्रों की ज़मीनों की सुरक्षा करना है, जो संवेदनशील माने जाते हैं. CM हिमंत बिस्वा सरमा ने सोमवार 17 अगस्त 2026 कोब्रह्मपुत्र घाटी में रहने वालों उन लोगों से भी अपील की है जो देश के दूसरे राज्यों से आकर असम में बसे हैं, कि जनगणना 2027 की प्रक्रिया के तहत चल रहे हाउसलिस्टिंग ऑपरेशन और हाउसिंग सेंसस में असमिया को अपनी मातृभाषा के तौर पर दर्ज कराएं.

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