हेमंत शर्मा, इंदौर। कलेक्टर जनसुनवाई में मंगलवार को उस वक्त सनसनी फैल गई जब भागीरथपुरा निवासी एक युवक ने खुद को मानसिक रूप से प्रताड़ित बताते हुए ‘इच्छा मृत्यु’ की अनुमति देने की मांग कर डाली। युवक ने कलेक्टर को सौंपे ज्ञापन में साफ लिखा है कि गंदी गालियां देकर ऑडियो वायरल किया गया, नौकरी छिन गई, समाज में बदनामी हुई, अब जीने का कोई सहारा नहीं बचा। आवेदन देने वाले यतीन्द्र यादव ने बताया कि वह पिछले 15 वर्षों से नगर निगम में नियमित रूप से ईमानदारी से काम कर रहे थे। उनके मुताबिक सेवा अवधि में कभी कोई प्रतिकूल टिप्पणी या आपराधिक प्रकरण दर्ज नहीं हुआ।
क्या है पूरा मामला?
युवक के अनुसार 23 दिसंबर 2024 को नगर निगम के आदेश पर वे खातीवाला टैंक क्षेत्र में एक निर्माणाधीन मकान पर निगम का नोटिस तामील कराने पहुंचे थे। आरोप है कि निर्माण स्थल पर मौजूद लोगों ने नोटिस लेने से इनकार कर दिया। नियमानुसार नोटिस चस्पा करने की कार्रवाई के दौरान स्थानीय पार्षद कमलेश कालरा से फोन पर बात करवाई गई। यतीन्द्र यादव का आरोप है कि पार्षद ने फोन पर नोटिस वापस ले जाने का दबाव बनाया और जब उन्होंने मना किया तो उन्हें कथित रूप से मां-बहन की गालियां दी गईं। इतना ही नहीं, बातचीत का ऑडियो वायरल कर दिया गया, जिससे पूरे शहर में उनकी छवि खराब हुई।
“सरकार और पुलिस पर मेरा प्रभाव है” – युवक का दावा
ज्ञापन में युवक ने आरोप लगाया है कि पार्षद ने फोन पर कहा कि “सरकार और पुलिस प्रशासन पर मेरा प्रभाव है, कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता।” साथ ही नौकरी से हटवाने की धमकी भी दी गई। युवक का कहना है कि बाद में उन्हें नौकरी से हटा दिया गया, जिसके बाद से परिवार आर्थिक और मानसिक संकट से गुजर रहा है।
परिवार पर पड़ा गहरा असर
युवक ने लिखा है कि उनके पिता दर्जी का काम करते हैं। परिवार में माता-पिता, पत्नी और दो बच्चे हैं। ऑडियो वायरल होने के बाद समाज में ताने सुनने पड़ रहे हैं। एक साल से पूरा परिवार सदमे में है। युवक का कहना है कि ईमानदारी से काम करने की सजा उन्हें बेरोजगारी और बदनामी के रूप में मिली। अब वे आत्महत्या जैसा कदम नहीं उठाना चाहते, इसलिए कानून के तहत इच्छा मृत्यु की अनुमति मांग रहे हैं।इंदौर जैसे शहर में अगर एक निगम कर्मचारी को नोटिस चस्पा करने पर इस तरह की स्थिति का सामना करना पड़े, तो सिस्टम पर सवाल खड़े होना लाजिमी है।

