India Infant Mortality Report 2024: देश में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने की कोशिशों का असर अब धीरे-धीरे दिखने लगा है। बीते कुछ वर्षों में शिशु मृत्यु दर (Infant Mortality Rate) में कमी दर्ज की गई है, लेकिन हालात अब भी पूरी तरह संतोषजनक नहीं हैं। खासकर ग्रामीण इलाकों में नवजात बच्चों की मौत के आंकड़े चिंता बढ़ा रहे हैं।

सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (SRS) 2024 की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में शिशु मृत्यु दर 2019 में प्रति 1000 जीवित जन्म पर 30 थी, जो अब घटकर 24 हो गई है। यानी अब पहले की तुलना में कम बच्चे जन्म के एक साल के भीतर अपनी जान गंवा रहे हैं। इसके बावजूद देश में आज भी हर 42 में से एक बच्चा अपना पहला जन्मदिन नहीं देख पाता।

ग्रामीण इलाकों में ज्यादा खतरा

रिपोर्ट बताती है कि गांवों में स्थिति शहरों से कहीं ज्यादा खराब है। ग्रामीण क्षेत्रों में हर 37 में से एक बच्चे की मौत जन्म के पहले साल में हो रही है। स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी, जागरूकता का अभाव और समय पर इलाज न मिलना इसके बड़े कारण माने जा रहे हैं।

इन राज्यों में सबसे खराब हालात

शिशु मृत्यु दर के मामले में छत्तीसगढ़ देश में सबसे ऊपर रहा, जहां IMR 36 दर्ज की गई। इसके बाद उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में यह आंकड़ा 35 रहा। विशेषज्ञों का कहना है कि इन राज्यों में सिर्फ अस्पतालों में डिलीवरी बढ़ाना काफी नहीं है, बल्कि नवजातों की देखभाल, पोषण और समय पर उपचार भी बेहद जरूरी है।

केरल बना देश का सबसे बेहतर राज्य

जहां कई राज्य संघर्ष कर रहे हैं, वहीं केरल ने शानदार प्रदर्शन किया है। यहां शिशु मृत्यु दर सिर्फ 8 दर्ज की गई, जो देश में सबसे कम है। इसके अलावा हिमाचल प्रदेश, तमिलनाडु और दिल्ली में IMR 11 रही। बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं, महिलाओं की शिक्षा और जागरूकता को इसका बड़ा कारण माना जा रहा है।

जन्म के बाद पहले 28 दिन सबसे अहम

विशेषज्ञों के मुताबिक, बच्चों की सबसे ज्यादा मौतें जन्म के बाद पहले 28 दिनों के भीतर होती हैं। इसे नवजात मृत्यु दर (Neo-Natal Mortality Rate) कहा जाता है। देश में कुल शिशु मौतों में लगभग 73% मौतें इसी अवधि में हुईं। भारत की नवजात मृत्यु दर 18 प्रति 1000 जीवित जन्म दर्ज की गई। इस मामले में भी केरल सबसे बेहतर रहा, जहां यह दर सिर्फ 6 रही। वहीं मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में यह आंकड़ा 26 और उत्तर प्रदेश में 25 दर्ज किया गया।

लड़कियों की मौत के मामले भी चिंता का विषय

रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि कई राज्यों में लड़कियों की शिशु मृत्यु दर लड़कों से ज्यादा है। बिहार में लड़कों की IMR 21 रही, जबकि लड़कियों की 25 दर्ज की गई। वहीं जम्मू-कश्मीर में स्थिति इसके उलट देखने को मिली।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत किया जाए, पोषण और टीकाकरण पर ध्यान बढ़ाया जाए तथा मातृ स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार किया जाए, तो आने वाले वर्षों में इन आंकड़ों में और गिरावट लाई जा सकती है।

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