हेमंत शर्मा, इंदौर। देश के सबसे स्वच्छ शहर का दावा करने वाले इंदौर में नगर निगम का अपना परिषद भवन ही 12 साल बाद भी पूरा नहीं हो पाया। जिस भवन से शहर की सरकार चलनी थी, वह आज भी अधूरा है। हालत यह है कि कई विभाग अब भी पुराने भवनों से काम कर रहे हैं, जबकि परिषद भवन के निर्माण पर वर्षों से करोड़ों रुपये खर्च किए जा चुके हैं। अब यह परियोजना नगर निगम की कार्यप्रणाली और योजनाओं के क्रियान्वयन पर बड़े सवाल खड़े कर रही है।

2014 में शुरू हुआ था सपना, 2026 में भी अधूरा

नगर निगम परिसर में नए परिषद भवन का निर्माण 27 अक्टूबर 2014 को शुरू किया गया था। उस समय करीब 11 करोड़ रुपये की लागत से इसे दो साल में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था। उम्मीद थी कि 2016 तक नगर निगम को आधुनिक परिषद भवन मिल जाएगा, लेकिन समय बीतता गया और परियोजना लगातार लटकती चली गई।

लागत बढ़ती रही, समय सीमा बढ़ती रही, लेकिन भवन पूरा नहीं हुआ। 2023 में भी इसे पूरा करने का दावा किया गया था, लेकिन वह भी अधूरा रह गया। अब 2026 में भी स्थिति जस की तस बनी हुई है।

करोड़ों की नई बिल्डिंग की तैयारी, पुरानी परियोजना अधर में

एक ओर नगर निगम प्रशासन करीब 250 करोड़ रुपये की लागत से नई प्रशासनिक बिल्डिंग बनाने की तैयारी कर रहा है, वहीं दूसरी ओर 12 साल पुराना परिषद भवन अब तक पूरा नहीं हो पाया। सवाल यह उठ रहा है कि जब पहले से चल रही परियोजना पूरी नहीं हो सकी, तो नई परियोजना समय पर कैसे पूरी होगी?

परिषद हॉल तैयार, बाकी भवन अब भी अधूरा

वर्तमान परिषद का कार्यकाल भी लगभग पूरा होने वाला है, लेकिन जिस भवन में शहर की सरकार को स्थायी रूप से बैठना था, वह आज भी अधूरा है। केवल परिषद हॉल तैयार हो पाया है, जहां परिषद सम्मेलन आयोजित किए जाते हैं। इसके अलावा कई विभाग अब भी पुराने कार्यालयों में ही संचालित हो रहे हैं।बताया जा रहा है कि भवन को पूरा करने के लिए करीब 50 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आवश्यकता थी। इसके लिए मुख्यमंत्री से भी बजट की मांग की गई, लेकिन राशि स्वीकृत नहीं हो सकी।

निर्माण के बाद याद आई फायर फाइटिंग लाइन

परियोजना की सबसे बड़ी विडंबना यह रही कि भवन निर्माण के दौरान फायर फाइटिंग सिस्टम की समुचित व्यवस्था नहीं की गई। बाद में भवन की दीवारों में दोबारा छेद कर पाइपलाइन बिछानी पड़ी। यानी निर्माण पूरा होने के बाद फिर से तोड़फोड़ करनी पड़ी, जिससे योजना और निगरानी पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

अधूरे भवन की कीमत जनता ने भी चुकाई

परिषद भवन समय पर तैयार नहीं होने का असर नगर निगम की बैठकों पर भी पड़ा। वर्ष 2021 तक परिषद सम्मेलन निजी होटलों और अन्य स्थानों पर आयोजित किए गए। इन बैठकों पर करीब 4 करोड़ रुपये खर्च होने की जानकारी सामने आई थी। इस मामले को लेकर जनहित याचिका भी दायर हुई थी। बाद में परिषद हॉल तैयार होने के बाद बैठकें यहीं होने लगीं, लेकिन पूरा भवन अब तक उपयोग के लिए तैयार नहीं हो पाया।

सबसे बड़ा सवाल…

इंदौर नगर निगम शहर को स्मार्ट, आधुनिक और सुव्यवस्थित बनाने के दावे करता है, लेकिन उसकी अपनी सबसे महत्वपूर्ण प्रशासनिक परियोजना 12 वर्षों में भी पूरी नहीं हो सकी। लागत बढ़ी, समय बढ़ा, योजनाएं बदलीं और अब नई बिल्डिंग की तैयारी शुरू हो गई, जबकि पुराना सपना आज भी अधूरा पड़ा है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर इस देरी के लिए जिम्मेदार कौन है? करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद परियोजना समय पर पूरी क्यों नहीं हुई? और क्या इस पूरी प्रक्रिया की जवाबदेही कभी तय होगी, या फिर यह मामला भी सरकारी फाइलों में दबकर रह जाएगा?

Follow the LALLURAM.COM MP channel on WhatsApp
https://whatsapp.com/channel/0029Va6fzuULSmbeNxuA9j0m