दिल्ली हाई कोर्ट ने कथित ठग सुकेश चंद्रशेखर से जुड़े 217 करोड़ रुपये के रंगदारी मामले में आरोपी अरुण मुथु, बी. मोहनराज, सुधीर और कमलेश कोठारी को जमानत दे दी है। अदालत ने कहा कि चारों लंबे समय से न्यायिक हिरासत में हैं और 24 आरोपियों तथा 403 गवाहों वाले इस जटिल मामले में मुकदमे के जल्द पूरा होने की संभावना नहीं है। ऐसे में उन्हें जमानत दिए जाने का आधार बनता है।

अरुण मुथु की भूमिका पर अदालत की टिप्पणी

न्यायमूर्ति प्रतीक जालान की एकल पीठ ने कहा कि अभियोजन पक्ष के अनुसार अरुण मुथु रंगदारी की वारदात में प्रत्यक्ष रूप से शामिल नहीं था। उस पर सुकेश चंद्रशेखर और लीना पालोस के लिए कथित अपराध से अर्जित धन के प्रबंधन, संपत्तियां और लग्जरी कारें खरीदने, वित्तीय लेनदेन कराने, लीना की फर्म के लिए बैंकिंग एंट्रियां कराने तथा वेब सीरीज के निर्माण में सहयोग करने के आरोप हैं। अभियोजन का दावा है कि इन सेवाओं के बदले वह 2.5 प्रतिशत कमीशन प्राप्त करता था।

धन प्रबंधन से आगे भूमिका का प्रथम दृष्टया कोई आधार नहीं

अदालत ने कहा कि उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर प्रथम दृष्टया ऐसा कोई ठोस साक्ष्य नहीं है जिससे यह माना जा सके कि अरुण मुथु की भूमिका कथित धन प्रबंधन से अधिक व्यापक थी। कोर्ट ने माना कि लंबी अवधि की हिरासत, मामले की जटिलता और ट्रायल में संभावित देरी को देखते हुए जमानत उचित है।

जमानत आदेश का ट्रायल पर नहीं पड़ेगा असर

हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जमानत आदेश में की गई टिप्पणियां केवल जमानत याचिका के निस्तारण तक सीमित हैं। इनका मुकदमे के गुण-दोष या अंतिम सुनवाई पर कोई प्रभाव नहीं माना जाएगा। इसी आधार पर सह-आरोपी बी. मोहनराज, सुधीर और कमलेश कोठारी को भी राहत प्रदान की गई।

लीना पालोस को नहीं मिली थी राहत

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि सह-आरोपी लीना पालोस का मामला अलग है। उसकी जमानत याचिका मई में खारिज कर दी गई थी। कोर्ट ने तब कहा था कि प्रथम दृष्टया वह कथित संगठित अपराध सिंडिकेट के केंद्र में थी, इसलिए उसका मामला अन्य आरोपियों से भिन्न माना गया।

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