पश्चिम बंगाल में एसआईआर प्रक्रिया के तहत कुल 38,20,683 अपीलें दाखिल की गई थीं. जिसमें से अब तक केवल  1.02 लाख मामलों का ही निपटारा हो सका है. 37 लाख से ज्यादा अपीलें अभी भी पेंडिंग हैं. अंदेशा ऐसा लगाया जा रहा है कि अगर रफ्तार यही रही तो बचे हुए अपील का निपटारा होने में करीब 16 साल लगेंगे. जिसे लेकर चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट से इन अपीलों का जल्दी निपटारा करने के लिए राज्य में ट्रिब्यूनल की संख्या 19 से बढ़ाकर 42 करने की मांग की है.

पश्चिम बंगाल की वोटर लिस्ट में हुए SIR की प्रक्रिया के बाद अब तक लाखों लंबित अपीलों का फैसला नहीं हो सका है. वोटर लिस्ट से जुड़े 37 लाख से ज्यादा अपीलें पेंडिंग हैं.

भारत के निर्वाचन आयोग ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि पश्चिम बंगाल में SIR के दौरान वोटर लिस्ट से हटाए गए वोटरों से जुड़ी 37 लाख से ज्यादा अपीलों के तेजी से निपटारे के लिए उसे कुल 42 चुनाव ट्रिब्यूनल की जरूरत है. आयोग ने कहा कि पेंडिंग अपीलों के निपटारे की प्रक्रिया को और बेहतर और तेज बनाने के लिए ये प्रस्ताव है.

इनमें से 22 लाख से ज्यादा अपीलें उन वोटरों ने की हैं. इनके नाम लिस्ट से हटा दिए गए थे और लगभग 16 लाख अपीलें ऐसी हैं जिनमें SIR के बाद वोटर लिस्ट में नाम शामिल किए जाने को चुनौती दी गई है.

पेंडिंग अपीलों का तेजी से निपटारा के लिए चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में सुझाव दिया है कि राज्य में लोकसभा सीटों की संख्या के बराबर ही ट्रिब्यूनल होने चाहिए. पश्चिम बंगाल में 42 संसदीय निर्वाचन क्षेत्र हैं. ECI द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, ट्रिब्यूनल के सामने दाखिल 38 लाख अपीलों में से 57% से ज्यादा अपीलें नाम हटाए जाने के खिलाफ हैं.

जानकारी में बताया गया कि अभी अपीलों पर सुनवाई के लिए 19 ट्रिब्यूनल काम कर रहे हैं. ECI ने कहा कि इन अपीलों का तेजी से निपटारा करने के लिए मौजूदा ट्रिब्यूनल की संख्या से ज्यादा ट्रिब्यूनल की जरूरत है. चुनाव आयोग का यह हलफनामा तृणमूल कांग्रेस के नेता और राज्यसभा सांसद डेरेक ओ’ब्रायन की अर्जी के जवाब में आया है.

Follow the LALLURAM.COM MP channel on WhatsApp
https://whatsapp.com/channel/0029Va6fzuULSmbeNxuA9j0m