हेमंत शर्मा, इंदौर। शहर की लगातार बढ़ती आबादी, वाहनों की बढ़ती संख्या और बायपास के आसपास तेजी से हो रहे निर्माण के बीच ट्रैफिक जाम की समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है। इसी समस्या से राहत दिलाने के लिए प्रस्तावित 4-लेन सर्विस रोड प्रोजेक्ट पिछले करीब पांच साल से कागजों और मंजूरी की प्रक्रिया में उलझा हुआ है। करीब 543 करोड़ की लागत वाले इस प्रोजेक्ट को लेकर अब एक बार फिर नगर निगम और भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के बीच जिम्मेदारी को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई है। प्रस्तावित सर्विस रोड का उद्देश्य बायपास पर रोजाना लगने वाले जाम को कम करना और भारी वाहनों के दबाव से शहर के मुख्य यातायात को राहत देना है। लेकिन प्रोजेक्ट की मंजूरी, जमीन और वित्तीय जिम्मेदारी को लेकर मामला लगातार आगे नहीं बढ़ पा रहा है।
2021-22 में बनी थी 4-लेन सर्विस रोड की योजना
जानकारी के मुताबिक, बायपास के दोनों ओर करीब 32-32 किलोमीटर लंबी 4-लेन सर्विस रोड बनाने की योजना वर्ष 2021-22 में तैयार की गई थी। इसका मकसद बायपास पर बढ़ते ट्रैफिक दबाव को कम करना और आसपास विकसित हो रहे रिहायशी व व्यावसायिक क्षेत्रों को बेहतर कनेक्टिविटी देना था। बाद में वर्ष 2025 में राज्य सरकार ने बायपास के दोनों ओर करीब 45-45 मीटर कंट्रोल एरिया को नोटिफाई किया। इसके बाद करीब 22.5 मीटर जमीन पर मिश्रित भूमि उपयोग (मिक्स्ड लैंड यूज) की मंजूरी भी दी गई। इस बीच करीब 543 करोड़ की लागत का विस्तृत प्रोजेक्ट रिपोर्ट यानी DPR भी तैयार की गई, लेकिन बजट की व्यवस्था नहीं होने के कारण योजना अब तक जमीन पर नहीं उतर पाई।
NHAI ने क्यों खड़े किए हाथ?
प्रोजेक्ट को लेकर नगर निगम की ओर से NHAI को प्रस्ताव भेजा गया था। लेकिन NHAI की ओर से यह कहते हुए प्रस्ताव पर सहमति नहीं दी गई कि बायपास पर पहले से ही 2-लेन सर्विस रोड का निर्माण किया जा चुका है। NHAI का तर्क है कि अब चूंकि यह क्षेत्र नगरीय सीमा में आता है, इसलिए 4-लेन सर्विस रोड को चौड़ा करने का वित्तीय भार नगर निगम को ही उठाना होगा। यही वजह है कि करीब 543 करोड़ रुपये की लागत वाला यह प्रोजेक्ट एक बार फिर नगर निगम के पाले में आ गया है।
नगर निगम के सामने 543 करोड़ का बड़ा सवाल
NHAI के रुख के बाद अब नगर निगम के सामने सबसे बड़ी चुनौती इतनी बड़ी राशि की व्यवस्था करना है। नगर निगम पहले से ही कई बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है। ऐसे में बायपास की दोनों तरफ 4-लेन सर्विस रोड के लिए करीब 543 करोड़ रुपये जुटाना आसान नहीं माना जा रहा। हालांकि, प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने के लिए नगर निगम ने अर्बन चैलेंज फंड के तहत सहायता राशि प्राप्त करने के लिए नया प्रस्ताव तैयार करने की प्रक्रिया शुरू की है।
तीन तरीके, जिनसे निगम निकाल सकता है अपनी लागत
रिपोर्ट के मुताबिक, प्रोजेक्ट पर होने वाली लागत को निकालने के लिए नगर निगम के सामने कुछ विकल्प भी हैं।
- कन्वर्जन प्रीमियम से आय – जमीन मालिकों द्वारा निर्माण या भूमि उपयोग में बदलाव के दौरान मिलने वाले कन्वर्जन प्रीमियम से निगम को राजस्व मिल सकता है।
- अतिरिक्त एफएआर शुल्क – मिक्स्ड लैंड यूज के तहत मिलने वाले अतिरिक्त फ्लोर एरिया रेशियो (FAR) की अनुमति से प्राप्त होने वाले शुल्क को भी प्रोजेक्ट की लागत में इस्तेमाल किया जा सकता है।
- प्रॉपर्टी टैक्स से बढ़ सकती है आय – सर्विस रोड बनने के बाद आसपास व्यावसायिक गतिविधियों और संपत्ति के विकास में बढ़ोतरी हो सकती है। इससे नगर निगम को प्रॉपर्टी टैक्स के रूप में दीर्घकालिक अतिरिक्त आय मिलने की संभावना है।
रिपोर्ट के अनुसार, विशेषज्ञों का मानना है कि अगर केंद्र की अर्बन चैलेंज फंड या किसी अन्य योजना से सहायता मिलती है और राज्य सरकार करीब 20 प्रतिशत योगदान करती है, तो नगर निगम इस प्रोजेक्ट को आगे बढ़ा सकता है।
सर्विस रोड बनने से इंदौर को क्या फायदा होगा?
अगर बायपास के दोनों ओर 4-लेन सर्विस रोड का निर्माण होता है तो इसका सीधा असर शहर के ट्रैफिक पर पड़ सकता है। पहला फायदा: बायपास पर रोजाना लगने वाले ट्रैफिक जाम से राहत मिल सकती है। दूसरा फायदा: भारी वाहनों के लिए अलग और बेहतर यातायात मार्ग उपलब्ध होगा, जिससे मुख्य सड़कों पर दबाव कम होगा। तीसरा फायदा: ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट (TOD) के तहत बायपास क्षेत्र में नए व्यावसायिक कॉरिडोर विकसित होने की संभावना बढ़ेगी। यानी सर्विस रोड सिर्फ ट्रैफिक व्यवस्था सुधारने वाला प्रोजेक्ट नहीं है, बल्कि आने वाले वर्षों में बायपास के आसपास के पूरे इलाके के विकास की दिशा भी बदल सकता है।
पांच साल से फाइलों में घूम रहा प्रोजेक्ट
बायपास पर ट्रैफिक का दबाव लगातार बढ़ रहा है। इसके बावजूद 4-लेन सर्विस रोड की योजना करीब पांच साल से अलग-अलग स्तर पर मंजूरी और वित्तीय व्यवस्था के बीच अटकी हुई है। एक तरफ शहर में लगातार नए रिहायशी और व्यावसायिक क्षेत्र विकसित हो रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ बायपास पर वाहनों का दबाव भी बढ़ता जा रहा है। ऐसे में सर्विस रोड प्रोजेक्ट की देरी का सीधा असर आम वाहन चालकों पर पड़ रहा है।अब देखना होगा कि 543 करोड़ रुपये के इस प्रोजेक्ट के लिए नगर निगम वित्तीय व्यवस्था कैसे करता है और अर्बन चैलेंज फंड से मदद मिलने के बाद योजना को आखिर कब जमीन पर उतारा जाता है।
Follow the LALLURAM.COM MP channel on WhatsApp
https://whatsapp.com/channel/0029Va6fzuULSmbeNxuA9j0m


