नई दिल्ली। पर्यावरण से जुड़ी एक नई रिपोर्ट ने भारत में जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभावों को लेकर गंभीर संकेत दिए हैं। पर्यावरण थिंक टैंक काउंसिल फॉर एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वॉटर’(Council on Energy, Environment and Water) के अनुसार आने वाले दो दशकों में देश को हर साल 15 से 40 अतिरिक्त ऐसे दिनों का सामना करना पड़ सकता है, जब तापमान सामान्य से काफी अधिक रहेगा। रिपोर्ट में कहा गया है कि यह प्रवृत्ति केवल गर्मी बढ़ने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर कृषि, जल संसाधन, शहरी जीवन और स्वास्थ्य पर भी देखने को मिलेगा। विशेषज्ञों के मुताबिक, लंबे समय तक बढ़ता तापमान हीटवेव की तीव्रता और अवधि दोनों को बढ़ा सकता है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि बढ़ती अत्यधिक गर्मी का असर सिर्फ मौसम तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका सीधा प्रभाव लोगों के स्वास्थ्य और देश की डिजिटल अर्थव्यवस्था पर भी पड़ेगा। CEEW के विश्लेषण के अनुसार, तापमान बढ़ने से हीटवेव और गर्मी से जुड़ी बीमारियों का जोखिम बढ़ सकता है। इससे खासकर बुजुर्गों, बच्चों और बाहर काम करने वाले लोगों पर ज्यादा असर पड़ने की आशंका जताई गई है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत के लगभग 281 डेटा सेंटरों को भी अतिरिक्त लागत का सामना करना पड़ सकता है। बढ़ते तापमान के कारण इन सेंटरों को ठंडा रखने के लिए ज्यादा बिजली और कूलिंग सिस्टम की जरूरत होगी, जिससे उनका ऑपरेटिंग खर्च बढ़ जाएगा।
रिपोर्ट के अनुसार, यह आकलन CRAVIS द्वारा तैयार किया गया है, जो एक AI-संचालित जलवायु इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म है। यह प्रणाली लंबे समय के मौसम और जलवायु डेटा का विश्लेषण करके भविष्य के रुझानों का अनुमान लगाती है। CRAVIS कई प्रमुख संस्थानों के डेटा का उपयोग करता है, जिनमें India Meteorological Department (IMD), पुणे स्थित Indian Institute of Tropical Meteorology (IITM) और Forest Survey of India शामिल हैं। इन स्रोतों से मिले 40 वर्षों से अधिक के ऐतिहासिक डेटा के आधार पर यह प्लेटफॉर्म जलवायु पैटर्न का अध्ययन करता है और 2070 तक के अनुमान तैयार करने में सक्षम बताया गया है।
CEEW के अनुसार आने वाले वर्षों में कई क्षेत्रों में हर साल 20 से 40 दिन ऐसे हो सकते हैं जब रात का तापमान सामान्य से अधिक रहेगा। इसे “असामान्य रूप से गर्म रातें” कहा जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि गर्म रातों की स्थिति इसलिए ज्यादा चिंताजनक है क्योंकि दिन की गर्मी के बाद शरीर को जो प्राकृतिक आराम और तापमान में गिरावट मिलती है, वह कम हो जाती है। इससे नींद की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है और शरीर पर तनाव बढ़ सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक, लगातार गर्म रातें हीट स्ट्रेस, डिहाइड्रेशन और हृदय संबंधी समस्याओं के जोखिम को भी बढ़ा सकती हैं, खासकर बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों के लिए।
इन राज्यों में गर्मी और बारिश बढ़ने के संकेत
रिपोर्ट में के अनुसार, महाराष्ट्र, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और तमिलनाडु जैसे राज्यों में हर साल लगभग 10 से 30 अतिरिक्त दिन तक असामान्य गर्मी और भारी बारिश दोनों में बढ़ोतरी की संभावना है। इस बदलाव का असर कई स्तरों पर पड़ सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि गर्मी और बारिश का यह संयुक्त दबाव स्वास्थ्य जोखिम बढ़ा सकता है, खासकर हीट स्ट्रेस, डिहाइड्रेशन और संक्रामक बीमारियों का खतरा, काम करने की क्षमता (productivity) को प्रभावित कर सकता है, क्योंकि लगातार मौसम अस्थिर रहेगा, बुनियादी ढांचे (infrastructure) जैसे सड़क, बिजली और जल निकासी व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव डाल सकता है। रिपोर्ट में यह भी चेतावनी दी गई है कि लगातार गर्म रहने वाली रातें शरीर को पर्याप्त ठंडक और रिकवरी का समय नहीं देतीं। इससे हीट स्ट्रेस, नींद की समस्या और अन्य स्वास्थ्य जटिलताएं बढ़ सकती हैं।
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