Odisha Desk, बालेश्वर: ओडिशा के बालेश्वर के जंगलों से बचाए गए पांचों ओरंगुटान इन दिनों भुवनेश्वर के नंदनकानन जूलॉजिकल पार्क में रखे गए हैं, जहां उनकी विशेष देखभाल की जा रही है। गुरुवार को नंदनकानन के डिप्टी डायरेक्टर प्रदीप मिरासे ने बताया कि इनमें से दो ओरंगुटान की तबीयत ठीक नहीं है और उनका इलाज चल रहा है, जबकि बाकी तीन की हालत स्थिर बनी हुई है।

पांचों में से एक ओरंगुटान को बुखार है जिसका इलाज चल रहा है, और वह दवाइयों पर अच्छा असर दिखा रहा है। एक छोटे ओरंगुटान के मल की जांच में पेट के कीड़े (वर्म इंफेक्शन) पाए गए, जिसके बाद उसे तुरंत दवा दी गई।

संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए उस बाड़े को लगातार सैनिटाइज और कीटाणुरहित किया जा रहा है जहां ये सभी रखे गए हैं। सेंट्रल जू अथॉरिटी (CZA) के निर्देश पर इन सभी का डीएनए टेस्ट भी कराया जाएगा। इनके पूरी तरह स्वस्थ होने के करीब 10 दिन बाद इनके ब्लड सैंपल लिए जाएंगे।

तस्करी का शक और वन्यजीव एजेंसियों की जांच

इन ओरंगुटानों को 8 सितंबर को बालेश्वर के एक जंगली इलाके से रेस्क्यू किया गया था। भारत में ओरंगुटान प्राकृतिक रूप से नहीं पाए जाते (ये मुख्य रूप से इंडोनेशिया और मलेशिया के जंगलों में मिलते हैं), इसलिए ओडिशा के जंगल में इनका मिलना एक बहुत बड़ा रहस्य और चिंता का विषय है।

वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री गणेश राम सिंह खूंटिया का कहना है कि सरकार की कोशिश इन्हें नंदनकानन में ही सुरक्षित रखने की होगी। वहीं, स्पेशल टास्क फोर्स (STF), वन विभाग और वाइल्डलाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो (WCCB) की संयुक्त टीम मिलकर इस बात की गहराई से छानबीन कर रही है कि आखिर इन्हें ओडिशा कौन लाया, ये यहां तक कैसे पहुंचे और इसके पीछे किस अंतरराष्ट्रीय वन्यजीव तस्करी गिरोह का हाथ है।

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